Rajya Sabha Election: झारखंड में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। मतदान से ठीक पहले एनडीए खेमे ने राजधानी रांची के रेडिशन ब्लू होटल में अपने विधायकों के साथ बैठक कर एकजुटता का संदेश दिया। इस दौरान विधायकों को मतदान प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी गई और मॉक पोल (प्रशिक्षण मतदान) के माध्यम से वोटिंग की पूरी प्रक्रिया का अभ्यास कराया गया।
बैठक में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी मौजूद रहे। नेताओं ने विधायकों को राज्यसभा चुनाव में मतदान के तकनीकी पहलुओं से अवगत कराया ताकि मतदान के दौरान किसी प्रकार की त्रुटि की संभावना न रहे। विशेष रूप से नए विधायकों को मतदान प्रक्रिया की बारीकियां समझाई गईं।
बैठक के दौरान एनडीए के सभी विधायक चुनाव को लेकर उत्साहित नजर आए और गठबंधन समर्थित उम्मीदवार परिमल नथवानी की जीत को लेकर भरोसा जताया। नेताओं ने दावा किया कि एनडीए के सभी विधायक एकजुट हैं और चुनाव में पूरी मजबूती के साथ गठबंधन उम्मीदवार का समर्थन करेंगे।
इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा पर होटल राजनीति का आरोप लगाने वाली कांग्रेस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि बीएनआर होटल में उनके विधायक किस उद्देश्य से ठहरे हुए हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व को अपने विधायकों की गतिविधियों पर भी जवाब देना चाहिए।
आदित्य साहू ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अपने पोलिंग एजेंट के रूप में झारखंड के बजाय बाहर के नेताओं को जिम्मेदारी दी है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या राज्य के कांग्रेस नेताओं पर पार्टी को पर्याप्त भरोसा नहीं है। उनके अनुसार, कांग्रेस के झारखंड प्रभारी और सह प्रभारी को पोलिंग एजेंट बनाए जाने से कई सवाल खड़े होते हैं।
एनडीए नेताओं ने दावा किया कि राज्यसभा चुनाव में गठबंधन की स्थिति मजबूत है और विधायक पूरी तरह संगठित हैं। वहीं विपक्षी दलों की रणनीति और दावों को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए।
बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन, सरयू राय सहित भाजपा, आजसू, जदयू और लोजपा के कई विधायक मौजूद रहे। सभी नेताओं ने चुनाव को लेकर अपनी तैयारियों की समीक्षा की और मतदान से पहले अंतिम रणनीति पर चर्चा की।
राज्यसभा चुनाव के मद्देनजर दोनों राजनीतिक खेमों की सक्रियता बढ़ गई है। ऐसे में मतदान से पहले होटल राजनीति, रणनीतिक बैठकों और विधायकों की गोलबंदी ने झारखंड की राजनीतिक हलचल को और तेज कर दिया है।
