Minor Assault Case : नाबालिग युवक को गंभीर रूप से प्रताड़ित कर उसके हाथ खौलते पानी में डालने के मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। न्यायायुक्त अनिल कुमार मिश्रा की अदालत ने इस मामले के तीन आरोपियों को अग्रिम जमानत देने से इनकार करते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी। अदालत ने मामले की गंभीरता और जांच की प्रगति को देखते हुए आरोपियों से हिरासत में पूछताछ को आवश्यक माना।
यह मामला नरकोपी थाना क्षेत्र में दर्ज कांड संख्या 14/2026 से जुड़ा हुआ है। प्राथमिकी के अनुसार, 27 अप्रैल 2026 की सुबह एक नाबालिग युवक के साथ मारपीट और क्रूरता की घटना को अंजाम दिया गया था। आरोप है कि चंपा उरांव, आनंद लकड़ा उर्फ आनंद उरांव और बिनोद लकड़ा उर्फ बिनोद उरांव ने युवक को रोककर पहले उसके साथ मारपीट की और फिर उसके दोनों हाथ जबरन उबलते पानी में डाल दिए।
घटना में पीड़ित अमित उरांव के हाथ और उंगलियां गंभीर रूप से झुलस गईं। परिजनों द्वारा उसे तत्काल इलाज के लिए रांची स्थित अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका उपचार किया गया। मामले के सामने आने के बाद पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की थी।
सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष आरोपियों की ओर से अग्रिम जमानत की मांग की गई, लेकिन न्यायालय ने उपलब्ध तथ्यों और आरोपों की प्रकृति को देखते हुए राहत देने से इंकार कर दिया। अदालत का मानना था कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए आरोपियों से पूछताछ जरूरी है और इस स्तर पर उन्हें अग्रिम जमानत देना जांच को प्रभावित कर सकता है।
कानूनी जानकारों के अनुसार, अदालत का यह फैसला इस बात का संकेत है कि बच्चों और किशोरों के खिलाफ हिंसा या अमानवीय व्यवहार से जुड़े मामलों में न्यायपालिका गंभीर दृष्टिकोण अपना रही है। वहीं, पुलिस अब मामले में आगे की कार्रवाई और साक्ष्य संग्रह की प्रक्रिया को तेज करेगी।
इस फैसले के बाद आरोपियों को तत्काल कानूनी राहत नहीं मिल सकी है। मामले की जांच जारी है और पुलिस घटना से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है। पीड़ित परिवार को उम्मीद है कि जांच के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित होगी।
