झारखंड में JPSC, JSSC और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है। आंदोलन के बीच राज्य सरकार ने समाधान की दिशा में पहल करते हुए प्रदर्शनकारी छात्रों को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बातचीत के लिए आमंत्रित किया। जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी धरनास्थल पहुंचे और पांच सदस्यीय छात्र प्रतिनिधिमंडल को मुख्यमंत्री आवास पर बैठक का प्रस्ताव दिया।
छात्रों ने मुख्यमंत्री आवास जाने से किया इनकार
प्रशासन की ओर से सदर अनुमंडल दंडाधिकारी (SDO), एसडीएम कुमार रजत, एडीएम धनंजय कुमार और अन्य अधिकारियों ने छात्रों से बातचीत की। हालांकि, छात्रों ने मुख्यमंत्री आवास पर होने वाली बैठक को स्वीकार नहीं किया। उनका कहना है कि यह केवल पांच प्रतिनिधियों का मुद्दा नहीं, बल्कि झारखंड के लाखों प्रतियोगी छात्रों के भविष्य से जुड़ा मामला है। इसलिए किसी भी प्रकार की वार्ता बंद कमरे में नहीं, बल्कि धरनास्थल पर सभी छात्रों की मौजूदगी में खुले मंच से होनी चाहिए।
सरकार ने निष्पक्ष कार्रवाई का दिया भरोसा
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि उनकी सरकार छात्रों की हर चिंता को गंभीरता से सुनने और उसका समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों से जुड़े कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। कई आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है और जांच एजेंसियां लगातार छापेमारी कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ होगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
JMM ने भी जताया समर्थन
सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने भी आंदोलनकारी छात्रों के प्रति समर्थन व्यक्त किया है। पार्टी नेताओं ने संकेत दिए हैं कि सरकार भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित कर सकती है। उन्होंने कहा कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कड़ी कार्रवाई होगी।
क्या हैं छात्रों की प्रमुख मांगें?
छात्रों का आंदोलन पहले 14वीं JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परिणामों के बाद शुरू हुआ था और अब 29 जुलाई से अनिश्चितकालीन सत्याग्रह के रूप में जारी है। प्रदर्शनकारी 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा रद्द करने, TDPL एजेंसी के माध्यम से आयोजित सभी परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच, JSSC-CGL समेत अन्य विवादित भर्ती प्रक्रियाओं की समीक्षा तथा भविष्य में पारदर्शी और जवाबदेह भर्ती प्रणाली लागू करने की मांग कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस और लिखित निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
