गोड्डा में सड़क नहीं, घायल युवती को 4 किलोमीटर खाट पर ढोकर पहुंचाया घर; विकास के दावों पर सवाल

गोड्डा के बड़ा केरा गांव में सड़क नहीं होने से घायल युवती को चार किलोमीटर तक खाट पर ढोकर घर पहुंचाना पड़ा। घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों की बदहाल आधारभूत सुविधाओं को उजागर किया।

Dayanand Roy
4 Min Read

Godda News : देश भले ही तकनीक और विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा हो, लेकिन झारखंड के गोड्डा जिले के कई गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। बोआरीजोर प्रखंड की मेघी पंचायत स्थित बड़ा केरा गांव में सड़क नहीं होने के कारण एक घायल युवती को चार किलोमीटर तक खाट पर ढोकर घर पहुंचाना पड़ा। इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं की बदहाल स्थिति को उजागर कर दिया है।

छत से गिरकर घायल हुई थी युवती

जानकारी के अनुसार, बड़ा केरा गांव निवासी 18 वर्षीय सुकुरमुनि पहाड़ीन अपने मामा के घर साहिबगंज जिले के मंडरो प्रखंड के डोरा गांव गई हुई थी। इसी दौरान वह घर की छत से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गई।

परिजनों ने पहले उसे साहिबगंज अस्पताल में भर्ती कराया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए रांची रेफर कर दिया गया। इलाज के बाद जब युवती को वापस गांव लाया गया, तब सड़क नहीं होने की समस्या सामने आई।

मेघी चौक से खाट पर तय किया 4 किलोमीटर का सफर

युवती के पिता डोमा पहाड़िया के अनुसार, वाहन से किसी तरह मरीज को मेघी चौक तक लाया गया, लेकिन वहां से बड़ा केरा गांव तक सड़क नहीं होने के कारण परिजनों और ग्रामीणों ने बांस की खाट का सहारा लिया।

भीषण गर्मी और कठिन रास्तों के बीच घायल युवती को करीब चार किलोमीटर तक कंधों पर ढोकर गांव पहुंचाया गया। इस दौरान परिवार को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

दर्जनों गांव आज भी सड़क से वंचित

ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ बड़ा केरा ही नहीं, बल्कि मेघी पंचायत के कई पहाड़िया गांव आज भी सड़क सुविधा से नहीं जुड़े हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी मूलभूत सेवाओं तक पहुंचने के लिए लोगों को लंबी दूरी पैदल तय करनी पड़ती है।

आपातकालीन स्थिति में मरीजों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को अस्पताल पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है। कई बार लोगों को खाट या अस्थायी स्ट्रेचर के सहारे मरीजों को ले जाना पड़ता है।

कई बार मांग के बावजूद नहीं बनी सड़क

ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि गांव तक सड़क निर्माण के लिए कई बार प्रशासन को आवेदन दिया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

मेघी पंचायत के मुखिया मनोज मरांडी ने बताया कि बरसात के दिनों में स्थिति और भयावह हो जाती है। कीचड़ और दुर्गम रास्तों के कारण गांवों तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो जाता है।

विकास के दावों पर उठे सवाल

सुकुरमुनि पहाड़ीन को खाट पर ढोकर गांव ले जाने की घटना ने ग्रामीण इलाकों में सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से बड़ा केरा समेत आसपास के सभी पहाड़िया गांवों को जल्द सड़क नेटवर्क से जोड़ने की मांग की है।

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *