राज्यसभा की खाली हो रही सीटों के लिए चुनाव 16 मार्च को, बिहार में पांचवी सीट के लिए होगी खींचतान

Dayanand Roy
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पटना : चुनाव आयोग ने   10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रमों की घोषणा कर दी है। इन सीटों पर  16 मार्च को मतदान होगा। इनमें बिहार की पांच सीटें हैं।

राजद के अमरेंद्र धारी सिंह, प्रेम चंद गुप्ता, जदयू के हरिवंश नारायण सिंह, रामनाथ ठाकुर और रालोमो के उपेन्द्र कुशवाहा का कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हो रहा है। चुनाव कार्यक्रम के अनुसार 5 मार्च तक नामांकन दाखिल किए जाएंगे, 6 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 9 मार्च तक उम्मीदवार नाम वापस ले सकेंगे।

16 मार्च को सुबह नौ बजे से चार बजे शाम तक मतदान होगा। उसी दिन शाम पांच बजे से मतों की गिनती होगी।

बताते चलें कि रिक्त हो रही सीटों के  हिसाब से इस बार राज्यसभा की एक सीट के लिए कम से कम 41 विधायकों की जरूरत होगी। ऐसे मे  राजद को अपने एक भी नेता को राज्यसभा भेजना मुश्किल है।

उसके  केवल 25 विधायक हैं। जदयू के पास 85 विधायक हैं। इसलिए वह अपनी दोनों सीटें बचा लेगी। हरिवंश नारायण सिंह राज्यसभा के उपसभापति हैं,जबकि रामनाथ ठाकुर केन्द्रीय मंत्री हैं। पार्टी इन दोनों को एक बार फिर राज्यसभा भेज सकती है। हालांकि नीतीश कुमार दो बार  से अधिक किसी को बहुत कम ही मौका देते हैं। इन दोनों का दूसरा टर्म पूरा हो रहा है।

वैसे दोनों मुख्य मंत्री और पार्टी प्रमुख नीतीश कुमार के करीबी हैं। भाजपा के पास  89 विधायक हैं। ऐसे में वह राजद की दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवारों को जिताने में कामयाब होगी।

लोजपा(रा)के 19, हम  के 5 और रालोमो के 4 विधायक हैं।सीटों के  इस आंकड़े के आधार पर एनडीए आराम से चार सीटें जीत सकता है और पांचवीं पर भी मजबूत दावेदारी रखता है। भाजपा अब विधानसभा की सबसे बड़ी पार्टी है, जबकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू के पास भी बड़ी ताकत है। जानकारों की मानें तो दोनों दलों की दो -दो सीटें तो पक्की हैं। लेकिन भाजपा अपनी बढ़ती ताकत के आधार पर ज्यादा हिस्सेदारी चाह सकती है। वहीं, छोटे दल भी दबाव में हैं। उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी रालोमो के पास मात्र चार विधायक हैं, लेकिन वे अपनी सीट बचाना चाहेंगे। वहीं, लोजपा(रा) भी अपने 19 विधायकों के आधार पर एक सीट की मांग कर सकती है।

ऐसे में सीट बंटवारा ही सबसे बड़ा राजनीतिक गणित बन गया है। जबकि महागठबंधन की स्थिति कमजोर है। राजद, कांग्रेस और वाम दल मिलाकर कुल 35 विधायक ही हैं। यह आंकड़ा एक सीट के लिए जरूरी कोटा से कम है। ऐसे में विपक्ष को या तो अतिरिक्त समर्थन जुटाना होगा या फिर क्रॉस वोटिंग की उम्मीद करनी होगी। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के सामने राज्यसभा में अपनी मौजूदगी बचाने की चुनौती है।

ऐसे में बिहार में राज्यसभा चुनाव का गणित एनडीए के पक्ष में है। लेकिन राजनीति का असली इम्तिहान गठबंधन के भीतर है। कौन कितनी सीट पाएगा, किसे दोबारा मौका मिलेगा और किसे इंतजार करना होगा। यह तय करेगा कि बहुमत की यह ताकत एकजुट रहती है या भीतर से खींचतान शुरू होती है। विपक्ष के लिए यह चुनाव अस्तित्व बचाने जैसा है, जबकि एनडीए के लिए संतुलन साधने की परीक्षा होगी।

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