मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि राज्य के प्रत्येक घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लक्ष्य को तय समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन और पेयजल योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
झारखंड मंत्रालय में आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद भी मौजूद रहे। बैठक में मुख्यमंत्री ने जल संकट प्रभावित क्षेत्रों की नियमित निगरानी कर त्वरित समाधान सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने जल सहियाओं की भूमिका को और मजबूत बनाने के निर्देश देते हुए कहा कि उन्हें समूहवार आईटीआई में प्लंबर का व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाए। साथ ही खराब चापाकलों की मरम्मत, सौर ऊर्जा आधारित जलापूर्ति योजनाओं के रखरखाव और संचालन की जिम्मेदारी भी उन्हें सौंपी जाए। उन्होंने बेहतर कार्य करने वाली जल सहियाओं को सम्मानित और प्रोत्साहित करने की भी बात कही।
समीक्षा के दौरान निर्माणाधीन परियोजनाओं की प्रगति पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने बड़ी योजनाओं की रियल टाइम मॉनिटरिंग के लिए ठेकेदारों का व्हाट्सएप समूह बनाने और प्रतिदिन कार्य प्रगति की समीक्षा करने का निर्देश दिया। उन्होंने जल जीवन मिशन के लिए मजबूत कार्य ढांचा तैयार करने तथा वित्तीय संतुलन बनाए रखने के लिए बैकअप प्लान विकसित करने पर भी जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने, योजनाओं के पूर्ण होने के बाद समय पर यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट प्राप्त करने और जल संरक्षण के लिए आधुनिक सोक पिट जैसी व्यवस्थाओं को बढ़ावा देने की बात कही। अधिकारियों ने बैठक में जानकारी दी कि दिसंबर 2028 तक राज्य के सभी ग्रामीण घरों में पाइपलाइन के माध्यम से पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
जल संरक्षण और भू-जल स्तर में सुधार को लेकर मुख्यमंत्री ने वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने और अनुपयोगी चापाकलों के बोरिंग को रिचार्ज पिट के रूप में इस्तेमाल करने के निर्देश दिए। उन्होंने लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने पर भी बल दिया।
बैठक में जल गुणवत्ता, स्वच्छता और कचरा प्रबंधन योजनाओं की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने, प्लास्टिक मुक्त गांवों को प्रोत्साहित करने तथा बेहतर कार्य करने वाले गांवों को पुरस्कृत करने की बात कही। इस दौरान जल जीवन मिशन, हर घर जल, जल गुणवत्ता निगरानी, ग्रामीण जलापूर्ति योजनाएं, स्वच्छ भारत मिशन, ओडीएफ प्लस, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन तथा गोबरधन योजना समेत विभिन्न कार्यक्रमों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई।
