बिहार के बरवान कला गांव की कहानी दिल को छू लेने वाली है। यहां पिछले करीब पांच दशकों से न बारात आई और न ही शहनाई की गूंज सुनाई दी। कभी शादी-ब्याह की रौनक से भरा रहने वाला यह गांव आज सन्नाटे में डूबा है। इसकी सबसे बड़ी वजह बुनियादी सुविधाओं की कमी मानी जा रही है। पक्की सड़क, बेहतर परिवहन, स्वास्थ्य सेवाएं और संचार व्यवस्था के अभाव में दूसरे गांवों के परिवार यहां अपनी बेटियों की शादी करने से कतराने लगे हैं। इसका असर गांव के युवाओं के भविष्य पर साफ दिखाई दे रहा है।
विवाह नहीं, पूरे समाज की चिंता
गांव में युवकों का विवाह न होना केवल व्यक्तिगत परेशानी नहीं, बल्कि सामाजिक चुनौती बन गया है। कई युवक उम्र के उस पड़ाव पर पहुंच चुके हैं, जहां परिवार बसाने का सपना लगभग टूट चुका है। विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक विवाह न होने से अकेलापन, मानसिक तनाव और भविष्य में बुजुर्गों की देखभाल जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं। ऐसे हालात पूरे सामाजिक ढांचे को प्रभावित करते हैं।
उम्मीद जगी, लेकिन फिर टूट गई
ग्रामीण बताते हैं कि पहले इस गांव में सामान्य रूप से शादियां होती थीं। लेकिन समय के साथ विकास कार्य ठप पड़ गए और गांव की छवि प्रभावित होने लगी। कुछ वर्ष पहले ग्रामीणों ने मिलकर अस्थायी सड़क बनाई थी, जिसके बाद लंबे अंतराल में एक शादी संपन्न हुई। पूरे गांव ने इसे उत्सव की तरह मनाया और बेहतर भविष्य की उम्मीद की। मगर बरसात में सड़क फिर खराब हो गई और गांव की उम्मीदें भी एक बार फिर अधूरी रह गईं। आज ग्रामीणों की सबसे बड़ी मांग यही है कि गांव तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचें, ताकि फिर से शहनाइयों की आवाज सुनाई दे सके।
