झारखंड के अंतिम छोर पर बसे उरुमकेला गांव में पहली बार पहुंचे जनप्रतिनिधि, जगी विकास की उम्मीद

झारखंड के अंतिम छोर पर बसे उरुमकेला गांव में पहली बार जनप्रतिनिधि के पहुंचने से ग्रामीणों में विकास की उम्मीद जगी, वर्षों पुरानी सड़क, बिजली, पानी और स्वास्थ्य समस्याएं उठीं।

Dayanand Roy
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Urumkela Village : उरुमकेला गांव, जो कुरडेग प्रखंड की बड़कीबिउरा पंचायत में स्थित है और झारखंड के अंतिम छोर पर बसे अति-दुर्गम गांवों में गिना जाता है, वहां रविवार को पहली बार किसी जनप्रतिनिधि के पहुंचने का दावा किया गया। गांव पहुंचे भूषण बाड़ा का ग्रामीणों ने पारंपरिक ढोल-नगाड़ों, नृत्य और गीत-संगीत के साथ भव्य स्वागत किया।

ग्रामीणों ने रखीं वर्षों पुरानी समस्याएं

ग्रामीणों ने विधायक के समक्ष सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि आजादी के बाद पहली बार कोई जनप्रतिनिधि गांव पहुंचा है, जिससे विकास की नई उम्मीद जगी है।

विधायक ने दिया विकास का भरोसा

भूषण बाड़ा ने कहा कि जनप्रतिनिधि का दायित्व केवल शहरों तक सीमित नहीं है। उरुमकेला जैसे दूरस्थ गांवों तक पहुंचकर लोगों की समस्याओं का समाधान करना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने आश्वासन दिया कि गांव में सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रयास किए जाएंगे।

कांग्रेस में शामिल हुए ग्रामीण

कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस नेता जिशान फिरदौस की अगुवाई में कई ग्रामीणों ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। विधायक ने सभी नए सदस्यों का स्वागत किया।

महिला कांग्रेस जिलाध्यक्ष का बयान

जोसिमा खाखा ने कहा कि उरुमकेला के लोगों का विश्वास और स्नेह उनके लिए सम्मान की बात है। उन्होंने गांव के विकास और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए निरंतर काम करने का भरोसा दिया।

यह दौरा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि ग्रामीणों के अनुसार दशकों से उपेक्षित इस सीमावर्ती गांव में पहली बार किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि ने पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनीं, जिससे स्थानीय लोगों में विकास को लेकर नई उम्मीद पैदा हुई है।

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