दुनिया भर में एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने वाले बैक्टीरिया चिकित्सा विज्ञान के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं। इनमें न्यू डेल्ही मेटालो-बीटा-लैक्टामेस (NDM) एंजाइम वाले बैक्टीरिया विशेष चिंता का विषय हैं। ये बैक्टीरिया उन शक्तिशाली एंटीबायोटिक दवाओं को भी बेअसर कर सकते हैं, जिन्हें डॉक्टर गंभीर संक्रमणों के इलाज के अंतिम विकल्प के रूप में इस्तेमाल करते हैं।
सूरज की रोशनी क्यों है महत्वपूर्ण?
सूर्य की अल्ट्रावायलेट (UV) किरणें लंबे समय से प्राकृतिक कीटाणुनाशक के रूप में जानी जाती हैं। सीवेज ट्रीटमेंट और जल शुद्धिकरण जैसी प्रक्रियाओं में भी इनका महत्व है। UV किरणें बैक्टीरिया के डीएनए को नुकसान पहुंचाकर उन्हें निष्क्रिय कर सकती हैं। हालांकि कुछ रेजिस्टेंट बैक्टीरिया ऐसी परिस्थितियों में भी जीवित रह जाते हैं, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है।
सऊदी अरब में मिला था खास बैक्टीरिया
वर्ष 2015 में सऊदी अरब के एक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में एक विशेष प्रकार का E. coli बैक्टीरिया पाया गया था, जिसमें NDM एंजाइम मौजूद था। इस खोज ने वैज्ञानिकों का ध्यान आकर्षित किया। इसके बाद किंग अब्दुल्ला यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी की शोधकर्ता डॉ. पेइंग हांग और उनकी टीम ने इस बैक्टीरिया पर गहन अध्ययन शुरू किया।
फेजेस और धूप का संयुक्त प्रभाव
शोधकर्ताओं ने पाया कि फेजेस नामक वायरस, जो बैक्टीरिया को संक्रमित करते हैं, इस रेजिस्टेंट बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचाने में सक्षम हैं। अध्ययन के दौरान सऊदी अरब के सीवेज प्लांट से फेजेस एकत्र किए गए और उन्हें विभिन्न प्रकार के E. coli बैक्टीरिया पर परीक्षण किया गया। परिणामों में देखा गया कि फेजेस और सूर्य के प्रकाश के संयुक्त प्रभाव से बैक्टीरिया तेजी से नष्ट होने लगे। जहां फेजेस की मौजूदगी में बैक्टीरिया लगभग दो घंटे में कमजोर पड़ने लगे, वहीं इनके बिना वे चार घंटे से अधिक समय तक जीवित रहे।
भविष्य के लिए नई उम्मीद
अपशिष्ट जल संयंत्रों में बैक्टीरिया नियंत्रण के लिए फेजेस का उपयोग कोई नया विचार नहीं है, लेकिन धूप और फेजेस के संयुक्त उपयोग से संक्रमण नियंत्रण की नई संभावनाएं सामने आई हैं। विशेष रूप से सऊदी अरब जैसे देशों में, जहां सूर्य का प्रकाश भरपूर मात्रा में उपलब्ध है और पानी बहुमूल्य संसाधन है, यह तकनीक भविष्य में बेहद उपयोगी साबित हो सकती है।
स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों को लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस दिशा में और सफल शोध होते हैं, तो एंटीबायोटिक-रेजिस्टेंट बैक्टीरिया से लड़ने के लिए प्राकृतिक और पर्यावरण-अनुकूल उपाय विकसित किए जा सकते हैं। इससे संक्रमण नियंत्रण के साथ-साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा को भी मजबूती मिल सकती है।
