पिछले कुछ वर्षों में 3 से 5 वर्ष की उम्र के बच्चों में एडिनॉइड बढ़ने की समस्या तेजी से सामने आ रही है। बदलती जीवनशैली, बढ़ता प्रदूषण, बार-बार होने वाले संक्रमण और एलर्जी इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं। कई बार माता-पिता इसे सामान्य सर्दी-जुकाम समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन समय पर इलाज न होने पर यह बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास को प्रभावित कर सकता है।
एडिनॉइड्स नाक के पीछे और गले के ऊपरी हिस्से में स्थित लिम्फॉइड ग्रंथियां होती हैं। ये शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और संक्रमण से बचाव में मदद करती हैं। हालांकि, बार-बार संक्रमण या एलर्जी के कारण इनके आकार में वृद्धि हो सकती है, जिससे सांस लेने का मार्ग अवरुद्ध होने लगता है।
एडिनॉइड बढ़ने के प्रमुख लक्षण
बच्चों में एडिनॉइड बढ़ने पर कुछ स्पष्ट संकेत दिखाई देते हैं, जिन पर तुरंत ध्यान देना चाहिए। इनमें लगातार नाक बंद रहना, दिन-रात मुंह खोलकर सांस लेना और सोते समय तेज खर्राटे लेना शामिल हैं। इसके अलावा, नींद के दौरान सांस रुकना (स्लीप एपनिया), नाक से बोलने जैसी आवाज आना, बार-बार सर्दी-जुकाम होना तथा कानों में संक्रमण या सुनने की क्षमता कम होना भी इसके महत्वपूर्ण लक्षण हैं।
चेहरे और कानों पर पड़ने वाला प्रभाव
यदि इस समस्या का समय पर उपचार न किया जाए, तो यह बच्चे के चेहरे की हड्डियों के विकास को प्रभावित कर सकती है। लगातार मुंह से सांस लेने के कारण दांत आगे की ओर निकल सकते हैं, ऊपरी जबड़ा संकरा हो सकता है और चेहरा असामान्य रूप से लंबा दिखाई दे सकता है। साथ ही, बढ़े हुए एडिनॉइड्स कान की नलियों को प्रभावित कर कान में तरल पदार्थ जमा होने, बार-बार संक्रमण और सुनने या सीखने में कठिनाई का कारण बन सकते हैं।
टॉन्सिल्स और सर्जरी की आवश्यकता
कई मामलों में एडिनॉइड बढ़ने के साथ टॉन्सिल्स भी बड़े हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में दोनों का एक साथ सर्जिकल उपचार अधिक प्रभावी माना जाता है। यदि दवाइयों से सुधार नहीं होता, तो ईएनटी विशेषज्ञ सर्जरी की सलाह दे सकते हैं। सर्जरी में देरी करने से चेहरे की हड्डियों में स्थायी बदलाव होने का खतरा बढ़ जाता है।
आधुनिक तकनीकों से सुरक्षित इलाज
वर्तमान समय में एडिनॉइड सर्जरी अत्याधुनिक और सुरक्षित तकनीकों से की जाती है। कोब्लेशन तकनीक में कम तापमान का उपयोग कर प्रभावित ऊतकों को हटाया जाता है, जबकि माइक्रोडिब्राइडर तकनीक सटीक सर्जरी में मदद करती है। इन आधुनिक प्रक्रियाओं से दर्द और रक्तस्राव कम होता है तथा बच्चे की रिकवरी भी तेजी से होती है, जिससे वह जल्द ही सामान्य जीवन में लौट सकता है।
