बिहार विधानसभा चुनाव: जदयू ने जारी की 44 उम्मीदवारों की दूसरी सूची

Dayanand Roy
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उम्मीदवारों के चयन में पार्टी ने सोशल इंजीनियरिंग पर विशेष ध्यान दिया है

सबसे अधिक 37 पिछड़ों को मौका दिया गया है।

(महेश कुमार सिन्हा)

पटना : बिहार विधानसभा चुनाव के लिये जदयू ने गुरुवार को 44 उम्मीदवारों की अपनी दूसरी सूची जारी कर दी। पार्टी ने बुधवार को 57 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की थी। जदयू इस बार  101 सीटों पर चुनाव लड़ रही है।दूसरी सूची के साथ पार्टी ने अपने सभी उम्मीदवार घोषित कर दिए। पार्टी ने 37 विधायकों को फिर मौका दिया है। आठ के टिकट कट गए हैं।

जदयू के 101 उम्मीदवारों में चार मुस्लिम और 13 महिलायें हैं। पार्टी ने उम्मीदवारों के चयन में सोशल इंजीनियरिंग का पूरा ख्याल रखा है। उसने पिछड़ा समाज को सर्वाधिक 37, अति पिछड़ा को 22, सवर्णों को 22, अनुसूचित जाति को 15 और अनुसूचित जनजाति से एक व्यक्ति को टिकट दिया है। इसके अतिरिक्त  पार्टी ने युवा वर्ग के साथ ही अनुभवी लोगों पर भी भरोसा जताया है।

इस तरह पार्टी ने पिछड़ों, दलितों के बीच अपना आधार मजबूत करने के लिए इस सूची में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने की कोशिश की है। ऐसे में जदयू की सूची ने एक बार फिर साबित किया है कि नीतीश कुमार सोशल इंजीनियरिंग के माहिर खिलाड़ी हैं। जदयू की सूची में आठ यादवों का नाम भी शामिल है। नीतीश कुमार ने 15 प्रतिशत सीट दलितों को दिया है, जबकि 13 प्रतिशत सीटें नीतीश कुमार ने अपने सबसे मजबूत वोट बैंक महिलाओं के खाते में डाला है। अनुसूचित जनजाति की प्रतिनिधित्व एक प्रतिशत रही है।

अति पिछड़े वर्ग में मल्लाह, तेली, कहार, पासवान, चंद्रवंशी, सोनार, नाई, लोहार, रजक, बढ़ई जैसी जातियों से कुल 37 उम्मीदवार शामिल हैं। सबसे अधिक उम्मीदवार कुशवाहा समुदाय से हैं जिनकी संख्या 13 है। वहीं, कुर्मी जाति से 12 उम्मीदवारों को टिकट दिया गया है। यादव और धानुक समुदाय से 8-8 प्रत्याशी बनाए गए हैं। वहीं 5 मांझी (मुसहर) और 5 रविदास को जबकि 2 पासी और पासवान-धोबी से 1-1 उम्मीदवार बनाया गया है। इस बार मुस्लिम, यादव, भूमिहार प्रत्याशी की संख्या कम हुई है। वहीं, भाजपा की तरह जदयू में भी सवर्ण जातियों में राजपूतों का दबदबा दिख रहा है।

जदयू ने सबसे अधिक 10 राजपूतों को उम्मीदवार बनाया है। जदयू की सूची में दूसरे नंबर पर भूमिहार   नेता है, जिन्हें उम्मीदवारों की सूची में 9 प्रतिशत हिस्सेदारी मिली है। जदयू ने ब्राह्मणों को 2 प्रतिशत जबकि कायस्थों को महज 1 प्रतिशत हिस्सेदारी दी है। भाजपा के मुकाबले जदयू की सूची अपेक्षाकृत मिश्रित है, परंतु दोनों दलों ने यादव उम्मीदवारों को सीमित अवसर दिए हैं।

यहां तक कि मंडल आयोग के जनक बीपी मंडल के पौत्र का भी टिकट काट दिया गया है। पहली सूची में एक भी मुस्लिम उम्मीदवार न होने के बाद दूसरी सूची में 4 मुस्लिम प्रत्याशियों को मैदान में उतारकर पार्टी ने समावेशी राजनीति का संदेश देने की कोशिश की है। शगुफ्ता अजीम को अररिया विधानसभा क्षेत्र से चुनावी मैदान में उतारा है। वहीं, मंजर आलम को जोकीहाट से टिकट दिया है। सबा जफर को अमौर विधानसभा सीट से अपना उम्मीदवार बनाया है। जबकि, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमा खान चैनपुर से उम्मीदवार घोषित किये गए हैं।

 सूची में वाल्मीकिनगर से रिंकु सिंह, सिकटा से समृद्ध वर्मा, नरकटिया से विशाल साह, केसरिया से शालिनी मिश्रा, शिवहर से श्वेता गुप्ता, सुरसंड से नगेन्द्र राउत, रुन्नीसैदपुर से पंकज मिश्रा, हरलाखी से सुधांशु शेखर, बाबूबरही से मीणा कामत, फुलपरास से शीला मंडल, लौकहा से सतीश साह, निर्मली से अनिरुद्ध प्रसाद, पिपरा से रामविलास कामत, सुपौल से विजेंद्र यादव, त्रिवेणीगंज से सोनम रानी, रानीगंज से अचिमित ऋषिदेव, अररिया से सगुप्ता अजिम, जोकीहाट से मंजर आलम, ठाकुरगंज से गोपाल अग्रवाल, अमौर से सवा जफर, सुपौल से कलाधर मंडल, धमदाहा से लेसी सिंह, कदमा से दुलामचंद्र गोस्वामी, मनिहारी से शंभु सुमन, बरारी से विजय निषाद, गोपालपुर से बुलो मंडल, सुल्तानगंज से ललित नारायण, कहलगाँव से शुभानंद, अमरपुर से जयंत राज, धौरेया से मनीष कुमार, बेलहर से मनोज यादव, चैनपुर से जमा खान, करगहर से वशिष्ठ सिंह, काराकाट से महाबली सिंह, नोखा से नागेंद्र चंद्रवंशी, कुर्था से पप्पु कुमार वर्मा, जहानाबाद से चंद्रेश्वर चंद्रवंशी, घोसी से ऋतुराज, नबीनगर से चेतन आनंद, रफीगंज से प्रमोद कुमार, बेलागंज से मनोरमा देवी, नवादा से विभा देवी, झाझा से दामोदर रावत और चकाई से सुमित कुमार सिंह को उम्मीदवार बनाया गया है।

लेखक न्यूजवाणी बिहार के संपादक हैं।

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