युवाओं की आवाज और भागीदारी को समर्पित है यह दिन, जानें इतिहास और महत्व

Dayanand Roy
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युवा किसी भी देश के विकास और बदलाव की मजबूत ताकत होते हैं। नई सोच, तकनीक, सांस्कृतिक और सामाजिक बदलाव में युवाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। इसी भूमिका और युवाओं से जुड़े मुद्दों को वैश्विक मंच पर सामने लाने के लिए हर साल 12 अगस्त को अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस यानी अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, इस दिन का उद्देश्य युवाओं से जुड़े मुद्दों पर ध्यान आकर्षित करना और उन्हें समाज के सक्रिय चेहरों के रूप में बढ़ावा देना है।

क्यों खास है अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस?

अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस सिर्फ युवाओं को शुभकामनाएं देने का अवसर नहीं है। यह शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, सामाजिक भागीदारी और युवाओं के अधिकार जैसे मुद्दों पर चर्चा का मंच भी है। इस दिन युवाओं को अपनी बात रखने और सामाजिक बदलाव में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। संयुक्त राष्ट्र भी युवाओं की क्षमता को आज के वैश्विक समाज में महत्वपूर्ण साझेदारी के रूप में देखता है।

1985 में रखी गई थी बड़ी नींव

अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस की कहानी 1985 से भी जुड़ी है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने उस वर्ष को अंतर्राष्ट्रीय युवा वर्ष: भागीदारी, विकास और शांति के रूप में मनाया था। इसका उद्देश्य युवाओं की भागीदारी, विकास और शांति में उनकी भूमिका को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाना था। इससे युवाओं से जुड़े मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा को बढ़ावा मिला।

12 अगस्त को ही क्यों मनाया जाता है?

अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस मनाने का विचार 1991 में वियना में आयोजित विश्व युवा मंच में युवाओं की ओर से सामने आया था। इसके बाद 1998 में लिस्बन में आयोजित विश्व युवा मंत्रियों के जिम्मेदार मंत्रियों ने 12 अगस्त को यह दिवस मनाने की सिफारिश की। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 17 दिसंबर 1999 को इस सिफारिश को मंजूरी दी। इसके बाद पहली बार 12 अगस्त 2000 को अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया गया।

यह दिवस कैसे मनाया जाता है?

हर साल इस दिवस के लिए एक विशेष थीम तय की जाती है और उसी के आधार पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। स्कूल, कॉलेज, सरकारी संस्थान, गैर-सरकारी संगठन और युवा समूह संगोष्ठी, चर्चा, कार्यशाला, सांस्कृतिक कार्यक्रम और जागरूकता अभियान आयोजित करते हैं। इन कार्यक्रमों का मकसद युवाओं की समस्याओं पर चर्चा करने के साथ उन्हें समाज और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करना होता है।

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