बरसात का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है, वहीं कई संक्रामक बीमारियों का जोखिम भी बढ़ा देता है। बारिश के दौरान हवा में नमी बढ़ने, जगह-जगह पानी जमा होने और भोजन व पेयजल के दूषित होने से डेंगू, मलेरिया, वायरल फीवर, फूड पॉइजनिंग, टाइफाइड और त्वचा संक्रमण जैसी समस्याएं तेजी से फैल सकती हैं। कई लोग बुखार या पेट खराब होने को सामान्य मौसमी असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि समय पर जांच और इलाज गंभीर स्थिति से बचा सकता है।
जमा पानी बनता है मच्छरों का सबसे बड़ा ठिकाना
डेंगू फैलाने वाला एडीज मच्छर साफ और रुके हुए पानी में भी पनप सकता है। कूलर, गमलों की ट्रे, पुराने टायर, छत पर रखे बर्तन, फ्रिज की ड्रिप ट्रे और पक्षियों के पानी के बर्तन इसके प्रजनन स्थल बन सकते हैं। इसलिए सप्ताह में कम से कम एक दिन ‘ड्राई डे’ रखें और घर के आसपास जमा पानी पूरी तरह खाली करें। कूलर की नियमित सफाई करें, पूरी बांह के कपड़े पहनें, मच्छरदानी और खिड़कियों पर जाली का उपयोग करें। बच्चों को सुबह-शाम बाहर खेलते समय मच्छरों से बचाव के उपाय जरूर अपनाने चाहिए।
बुखार को हल्के में लेना पड़ सकता है भारी
मानसून में आने वाला हर बुखार सामान्य नहीं होता। डेंगू में तेज बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द, कमजोरी और त्वचा पर चकत्ते दिखाई दे सकते हैं, जबकि मलेरिया में ठंड लगना, कंपकंपी और अधिक पसीना आना आम लक्षण हैं। यदि बुखार दो-तीन दिन से अधिक रहे या उल्टी, सांस लेने में तकलीफ, रक्तस्राव अथवा बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। बिना चिकित्सकीय सलाह के एस्पिरिन या आइबुप्रोफेन जैसी दवाएं न लें।
स्वच्छ भोजन और साफ पानी से रहें सुरक्षित
बारिश के मौसम में दूषित पानी और अस्वच्छ भोजन से पेट के संक्रमण, उल्टी-दस्त, फूड पॉइजनिंग और टाइफाइड का खतरा बढ़ जाता है। खुले में रखे खाद्य पदार्थ, कटे फल, बिना ढका स्ट्रीट फूड और लंबे समय तक रखा भोजन खाने से बचें। हमेशा उबला हुआ, फिल्टर किया हुआ या विश्वसनीय पैक्ड पानी ही पिएं। भोजन बनाने, फल-सब्जियां धोने और बर्तन साफ करने में भी स्वच्छ पानी का उपयोग करें। खाना खाने से पहले और शौचालय के बाद कम से कम 20 सेकंड तक साबुन से हाथ धोना जरूरी है।
बच्चों और बुजुर्गों को चाहिए विशेष देखभाल
बच्चों को बारिश में भीगने के बाद तुरंत सूखे कपड़े पहनाएं और गीले जूते-मोजे लंबे समय तक न पहनने दें, ताकि फंगल संक्रमण से बचाव हो सके। वहीं बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, मधुमेह के मरीज और कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों में संक्रमण जल्दी गंभीर हो सकता है। यदि बुखार, दस्त या कमजोरी महसूस हो तो इलाज में देरी न करें।
आहार-विहार में करें छोटे लेकिन जरूरी बदलाव
आयुर्वेद के अनुसार वर्षा ऋतु में पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है, इसलिए हल्का और सुपाच्य भोजन करना चाहिए। सुबह गुनगुना पानी पिएं, भोजन में अदरक, सौंठ, काली मिर्च, जीरा और अजवाइन जैसे मसालों को शामिल करें। ताजा, गर्म और ढका हुआ भोजन करें तथा बासी भोजन से बचें। पर्याप्त मात्रा में पानी, ओआरएस, नारियल पानी और सूप लेते रहें ताकि शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी न हो। नियमित रूप से योग, प्राणायाम और ध्यान करने से भी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनी रहती है।
सावधानी ही सबसे प्रभावी सुरक्षा कवच
विश्व स्वास्थ्य आंकड़ों के अनुसार हर वर्ष दुनियाभर में करोड़ों लोग डेंगू और मलेरिया से संक्रमित होते हैं। ऐसे में मानसून के दौरान थोड़ी-सी सावधानी, स्वच्छता और संतुलित खानपान अपनाकर अधिकांश मौसमी बीमारियों से बचा जा सकता है। याद रखें, साफ पानी, ताजा भोजन, हाथों की स्वच्छता और मच्छरों से बचाव ही स्वस्थ मानसून की सबसे मजबूत ढाल है।
