गोपनीय दस्तावेज लीक मामले में सरयू राय को कोर्ट से मोहलत, कर्मचारी को आरोपी बनाने की मांग पर 24 जून को होगी अगली सुनवाई

गोपनीय दस्तावेज लीक मामले में विधायक सरयू राय को अदालत से राहत मिली। कर्मचारी को आरोपी बनाने की याचिका पर अब 24 जून को सुनवाई होगी।

Dayanand Roy
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Saryu Roy: विधायक सरयू राय से जुड़े कथित गोपनीय दस्तावेज लीक मामले में एमपी-एमएलए की विशेष अदालत में गुरुवार को सुनवाई हुई। मामले में दस्तावेज का फोटो खींचने वाले कर्मचारी को आरोपी बनाने की मांग को लेकर दायर याचिका पर बहस हुई, लेकिन विधायक सरयू राय की ओर से अदालत में जवाब दाखिल नहीं किया गया। अब मामले की अगली सुनवाई 24 जून को निर्धारित की गई है।

जानकारी के अनुसार, अदालत में दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 319 के तहत एक याचिका दाखिल की गई है, जिसमें स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी शंभू सिंह को भी मामले में आरोपी बनाए जाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि जांच और गवाही के दौरान सामने आए तथ्यों से कर्मचारी की भूमिका की भी जांच आवश्यक है।

अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि अब तक चार गवाहों ने अपने बयान में यह दावा किया है कि उन्होंने शंभू सिंह को कथित रूप से गोपनीय दस्तावेज की तस्वीर लेते हुए देखा था। मामले में अनुसंधानकर्ता सहित कुल 12 गवाहों की गवाही दर्ज कराई जा चुकी है। इन्हीं बयानों के आधार पर कर्मचारी को भी आरोपी के रूप में शामिल करने की मांग उठाई गई है।

यह मामला वर्ष 2022 में उस समय चर्चा में आया था, जब स्वास्थ्य विभाग के तत्कालीन अवर सचिव ने रांची के डोरंडा थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया था कि विभाग के गोपनीय दस्तावेजों का दुरुपयोग कर उन्हें सार्वजनिक किया गया। आरोप है कि इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर विधायक सरयू राय ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्वास्थ्य विभाग में कथित अनियमितताओं का खुलासा किया था।

प्रेस वार्ता में सरयू राय ने कोविड-19 महामारी के दौरान प्रोत्साहन राशि वितरण में गड़बड़ी का आरोप लगाया था। उन्होंने तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता और विभागीय अधिकारियों पर नियमों की अनदेखी करते हुए दर्जनों लोगों को अवैध रूप से भुगतान करने का आरोप लगाया था। इसके बाद मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया।

फिलहाल विशेष अदालत के समक्ष यह प्रश्न विचाराधीन है कि उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर संबंधित कर्मचारी को भी आरोपी बनाया जाए या नहीं। अदालत के अगले आदेश पर सभी पक्षों की नजरें टिकी हुई हैं।

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