रामगढ़ के गोला प्रखंड स्थित बनतारा का प्राचीन बौद्ध मठ अब जल्द ही नए स्वरूप में नजर आएगा। लगभग 40 लाख रुपये की लागत से इस ऐतिहासिक मठ का जीर्णोद्धार किया जाएगा, जिसका कार्य अगले छह महीनों में पूरा होने की संभावना है। इस परियोजना के लिए सीएसआर फंड का उपयोग किया जाएगा।
आइटीआरएचडी टीम ने किया निरीक्षण
मठ की वर्तमान स्थिति का जायजा लेने के लिए मंगलवार को कंजरवेशन एक्सपर्ट और आइटीआरएचडी के राज्य प्रमुख श्रीदेव सिंह के नेतृत्व में टीम ने स्थल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान आर्किटेक्ट अरुण रंजन, चंदन कुमार, अजय कुमार मुखर्जी सहित कई स्थानीय लोग भी मौजूद रहे।
मुगलकालीन स्थापत्य का अनूठा उदाहरण
श्रीदेव सिंह ने बताया कि यह मठ मुगलकालीन बौद्ध स्थापत्य का एक महत्वपूर्ण नमूना है, लेकिन लंबे समय से देखरेख के अभाव में इसकी स्थिति जर्जर हो गई है। यह मठ बोधगया स्तूप की शैली से काफी मिलता-जुलता है। इसके गुंबद की दो दीवारों पर भगवान बुद्ध की प्रतिमाएं उकेरी गई हैं, जो इसकी ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता को दर्शाती हैं।
स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र
स्थानीय लोगों के अनुसार, यहां भगवान बुद्ध के अनुयायी समय-समय पर आते रहते हैं। मठ के अंदर बने ताखों को देखकर अनुमान लगाया जाता है कि यहां पहले कई मूर्तियां स्थापित थीं, जिन्हें बाद में हटा दिया गया। यह विरासत स्थल आज भी क्षेत्र के लोगों के बीच एक पूज्य स्मारक के रूप में जाना जाता है।
पारंपरिक निर्माण सामग्री से बना है मठ
विशेषज्ञों ने बताया कि मठ का निर्माण सूर्खी-चूना, स्थानीय पत्थरों और लाखौरी ईंटों से किया गया है। इसकी स्थापत्य शैली और निर्माण तकनीक इसे ऐतिहासिक दृष्टि से और भी महत्वपूर्ण बनाती है।
