शिवानंद तिवारी भी उतरे पप्पू यादव के समर्थन में

Dayanand Roy
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पटना :  पूर्णिया के  सांसद पप्पू यादव की गिरफ्तारी को लेकर बिहार की सियासत में इन दिनों गरमायी हुई है। उनके समर्थक लगातार उनकी गिरफ्तारी का विरोध कर रहे हैं। इस बीच वरिष्ठ समाजवादी नेता और पूर्व सांसद शिवानंद तिवारी  भी पप्पू यादव के समर्थन में आ गए हैं।

उन्होंने रविवार को फेसबुक पर लिखा कि बिहार की राजनीति में शायद ही कोई ऐसा नेता हो, जो इतनी ऊर्जा और फुर्ती के साथ हर जगह मौजूद रहता हो। पप्पू यादव बिहार की राजनीति में एक अनोखे और विशिष्ट व्यक्तित्व हैं। वे ऐसे एकमात्र राजनेता हैं जिन्होंने तीन बार निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतने का रिकॉर्ड बनाया है।

उन्होने लिखा है कि निर्दलीय उम्मीदवार और भी रहे हैं, लेकिन एक से अधिक बार निर्दलीय चुनाव जीतने का इतिहास सिर्फ पप्पू यादव के नाम दर्ज है। कुल मिलाकर अब तक वे छह मर्तबा लोकसभा का चुनाव जीत चुके है। अपने चुनावी सफ़र की शुरुआत उन्होंने विधानसभा चुनाव से की थी। वह चुनाव भी वे निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में ही लड़े और जीते थे। शिवानंद तिवारी ने यह भी

 लिखा है कि पप्पू यादव का शरीर भले ही भारी-भरकम हो, लेकिन उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी खासियत उनकी असाधारण सक्रियता है। बिहार की राजनीति में शायद ही कोई ऐसा नेता हो, जो इतनी ऊर्जा और फुर्ती के साथ हर जगह मौजूद रहता हो। सुबह वे कहीं और दिखाई देते हैं, शाम को किसी दूसरे इलाके में लगातार जनता के बीच।

कोरोना महामारी के दौरान यह पूरे बिहार ने देखा कि जब सरकार मृत्यु के आंकड़ों को लेकर सच्चाई से मुंह मोड़ रही थी, तब पप्पू यादव बिना मास्क के श्मशान घाटों पर खड़े होकर सच्चाई सामने ला रहे थे। पटना के विभिन्न श्मशान घाटों में हो रहे दाह-संस्कार इस बात की गवाही दे रहे थे कि सरकारी आंकड़े वास्तविकता से बहुत कम बताए जा रहे हैं।

तिवारी ने लिखा है कि, पटना के कंकड़बाग इलाके में जब छाती भर पानी भरा हुआ था, लोग पीने के पानी को तरस रहे थे और सरकारी सहायता कहीं दिखाई नहीं दे रही थी, तब पप्पू यादव उसी पानी में उतरकर लोगों तक पीने का पानी पहुंचा रहे थे। आज वही पप्पू यादव गिरफ्तार हैं। बताया जा रहा है कि उनकी गिरफ्तारी किसी अत्यंत पुराने मामले में हुई है।

हमारे देश की न्याय व्यवस्था की यह एक विडंबना है कि मुकदमे 25–30 वर्षों तक चलते रहते हैं और अचानक किसी एक दिन गिरफ्तारी हो जाती है। काग़ज़ों में लिखा होता है कि अभियुक्त को समन जारी किया गया, लेकिन वह अभियुक्त तक कभी पहुंचता ही नहीं। अचानक पुलिस गिरफ़्तारी का वारंट लेकर पहुंच जाती है। इसका व्यक्तिगत अनुभव हम लोगों को भी रहा है।

पप्पू यादव की गिरफ्तारी ने एक बार फिर न्यायपालिका और पुलिस के काम करने के तरीके पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हमें विश्वास है कि उन्हें जल्द जमानत मिल जाएगी, लेकिन इस घटना ने हमारी कानून व्यवस्था की कार्यप्रणाली को उजागर अवश्य कर दिया है।  उन्होने आशा व्यक्त की है कि वे शीघ्र ही जेल से बाहर आकर पहले की तरह जनता के बीच सक्रिय होंगे।

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