हर साल 7 जुलाई को वर्ल्ड चॉकलेट डे मनाया जाता है। यह दिन दुनिया की सबसे पसंदीदा मिठाइयों में शामिल चॉकलेट के इतिहास और उसके सफर को याद करने का अवसर है। माना जाता है कि 7 जुलाई 1550 के आसपास चॉकलेट पहली बार यूरोप पहुंची थी। इसके बाद धीरे-धीरे इसमें चीनी और दूध मिलाकर इसे वह मीठा स्वाद दिया गया, जिसे आज पूरी दुनिया पसंद करती है।
2500 साल पुराना है चॉकलेट का इतिहास
चॉकलेट की शुरुआत लगभग 2500 वर्ष पहले मैक्सिको और मध्य अमेरिका की माया और एज़्टेक सभ्यताओं से हुई थी। उस समय लोग कोको के दानों को पीसकर ‘ज़ोकोआटल (Xocoatl)’ नाम का कड़वा और मसालेदार पेय तैयार करते थे। इसे देवताओं का पेय माना जाता था। उस दौर की चॉकलेट आज की तरह मीठी नहीं, बल्कि तीखे स्वाद वाली होती थी।
कोको के दानों से बनती है स्वादिष्ट चॉकलेट
चॉकलेट बनाने की प्रक्रिया कई चरणों से होकर गुजरती है। सबसे पहले कोको के फलों (कोको पॉड) से बीज निकाले जाते हैं और उन्हें कुछ दिनों तक फरमेंटेशन (किण्वन) के लिए रखा जाता है। इसके बाद बीजों को सुखाकर भुना जाता है और पीसकर कोको लिकर तैयार किया जाता है। फिर इसमें जरूरत के अनुसार कोको बटर, चीनी और दूध पाउडर मिलाकर लंबे समय तक प्रोसेस किया जाता है। अंत में इसे सांचों में डालकर चॉकलेट बार का रूप दिया जाता है।
भारत में भी बढ़ रहा है चॉकलेट का उत्पादन
भारत में कोको की खेती मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में होती है। केरल का इडुक्की और कर्नाटक के कुछ इलाके आज प्रीमियम सिंगल-ओरिजिन चॉकलेट के लिए पहचान बना रहे हैं। वहीं, दुनिया में बेल्जियम अपनी बेहतरीन हस्तनिर्मित चॉकलेट और स्विट्जरलैंड अपनी क्रीमी मिल्क चॉकलेट के लिए सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है।
डार्क चॉकलेट के फायदे भी हैं कई
सीमित मात्रा में खासकर डार्क चॉकलेट का सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स हृदय स्वास्थ्य को बेहतर रखने में मदद कर सकते हैं। चॉकलेट खाने से शरीर में एंडोर्फिन और सेरोटोनिन जैसे ‘फील-गुड’ हार्मोन सक्रिय होते हैं, जो तनाव कम करने और मूड बेहतर बनाने में सहायक हो सकते हैं। कुछ शोधों के अनुसार, डार्क चॉकलेट मस्तिष्क में रक्त प्रवाह को बेहतर बनाने में भी मदद कर सकती है।
अधिक चॉकलेट खाना पड़ सकता है भारी
जहां सीमित मात्रा में चॉकलेट लाभ देती है, वहीं अधिक सेवन नुकसान भी पहुंचा सकता है। खासकर मिल्क और व्हाइट चॉकलेट में चीनी और कैलोरी अधिक होती है, जिससे वजन बढ़ने का खतरा रहता है। ज्यादा मीठी चॉकलेट खाने से दांतों में कैविटी हो सकती है। इसके अलावा चॉकलेट में थोड़ी मात्रा में कैफीन भी होता है, इसलिए रात में अधिक सेवन कुछ लोगों की नींद प्रभावित कर सकता है।
इन देशों में सबसे ज्यादा खाई जाती है चॉकलेट
चॉकलेट की खपत के मामले में यूरोप सबसे आगे है। स्विट्जरलैंड का प्रत्येक नागरिक औसतन लगभग 10 किलोग्राम चॉकलेट सालाना खाता है, जो दुनिया में सबसे अधिक माना जाता है। इसके बाद जर्मनी और ऑस्ट्रिया का स्थान आता है, जहां प्रति व्यक्ति खपत लगभग 8 से 8.2 किलोग्राम है। भारत में यह आंकड़ा अभी लगभग 150 से 200 ग्राम प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष है, लेकिन प्रीमियम और डार्क चॉकलेट का बाजार तेजी से बढ़ रहा है।
मैक्सिको की अनोखी चॉकलेट परंपरा
मैक्सिको में चॉकलेट सिर्फ मिठाई तक सीमित नहीं है। यहां की प्रसिद्ध पारंपरिक डिश ‘मोले पोब्लानो’ में डार्क चॉकलेट को मिर्च और कई मसालों के साथ मिलाकर गाढ़ी ग्रेवी तैयार की जाती है। इसे चिकन या अन्य व्यंजनों के साथ परोसा जाता है और खास मौकों, शादियों तथा त्योहारों पर बड़े चाव से खाया जाता है। यह परंपरा बताती है कि चॉकलेट का स्वाद सिर्फ मीठा ही नहीं, बल्कि मसालेदार भी हो सकता है।
