आजकल युवाओं में फिटनेस और बॉडीबिल्डिंग का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। आकर्षक शरीर और मसल्स बनाने की चाह में कई लोग बिना विशेषज्ञ की सलाह के प्रोटीन सप्लीमेंट्स का अधिक मात्रा में सेवन करने लगते हैं। हालांकि, जरूरत से ज्यादा प्रोटीन लेना स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है, खासकर किडनी पर इसका सीधा असर पड़ता है।
किडनी पर कैसे पड़ता है असर?
अत्यधिक प्रोटीन सप्लीमेंट लेने पर किडनी को उसे फिल्टर और प्रोसेस करने के लिए सामान्य से अधिक मेहनत करनी पड़ती है। मेडिकल साइंस में इस स्थिति को हाइपरफिल्ट्रेशन (Hyperfiltration) कहा जाता है। शुरुआत में यह समस्या महसूस नहीं होती, लेकिन लंबे समय तक अधिक प्रोटीन लेने से किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
प्रोटीन पचने के बाद अमीनो एसिड में बदल जाता है। अतिरिक्त अमीनो एसिड टूटकर अमोनिया बनाते हैं, जो शरीर के लिए विषैला होता है। इस अमोनिया को शरीर से बाहर निकालने का काम किडनी करती है। ऐसे में ज्यादा प्रोटीन का सेवन किडनी की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है।
ज्यादा प्रोटीन लेने के नुकसान
नेफ्रोटिक सिंड्रोम का खतरा
इस स्थिति में यूरिन के जरिए प्रोटीन बाहर निकलने लगता है, जिससे पैरों और शरीर में सूजन की समस्या हो सकती है।
वजन बढ़ना और पाचन संबंधी समस्याएं
जरूरत से अधिक प्रोटीन शरीर में फैट के रूप में जमा हो सकता है। इससे वजन बढ़ने के साथ कब्ज, गैस और अपच जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
किडनी मरीजों के लिए अधिक जोखिम
क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) से पीड़ित लोगों के लिए अधिक प्रोटीन का सेवन बेहद नुकसानदायक साबित हो सकता है।
कितनी मात्रा में लें प्रोटीन?
विशेषज्ञों के अनुसार, व्यक्ति को अपने वजन के अनुसार ही प्रोटीन का सेवन करना चाहिए। सामान्य तौर पर प्रति किलोग्राम वजन पर लगभग 1 ग्राम प्रोटीन पर्याप्त माना जाता है। उदाहरण के लिए, यदि आपका वजन 60 किलोग्राम है, तो आपको प्रतिदिन लगभग 60 ग्राम प्रोटीन की आवश्यकता होती है। किसी भी सप्लीमेंट का सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर या न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह अवश्य लें।
