आज की व्यस्त जीवनशैली में सिरदर्द, बदन दर्द या थकान होने पर लोग अक्सर तुरंत दर्दनिवारक दवा ले लेते हैं। कई लोगों के लिए पेनकिलर दवाएं रोजमर्रा की जरूरत बन चुकी हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि बिना डॉक्टर की सलाह बार-बार दर्दनिवारक दवाओं का सेवन करना लंबे समय में स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। दर्द से राहत जरूरी है, लेकिन उसके कारण को समझना और सही इलाज कराना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
हर दवा के हो सकते हैं दुष्प्रभाव
चिकित्सकों के अनुसार, हर दवा का कोई न कोई संभावित दुष्प्रभाव होता है। दर्दनिवारक दवाओं के इस्तेमाल से कुछ लोगों में जी मिचलाना, मुंह सूखना, त्वचा पर खुजली या झुनझुनी, धुंधला दिखाई देना और पेशाब करने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। हालांकि, ये दुष्प्रभाव हर व्यक्ति में समान नहीं होते और दवा के प्रकार, मात्रा तथा व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करते हैं।
लंबे समय तक सेवन से बढ़ सकता है खतरा
विशेषज्ञ बताते हैं कि लंबे समय तक या अधिक मात्रा में कुछ दर्दनिवारक दवाओं का सेवन करने से पेट में अल्सर या रक्तस्राव, किडनी और लीवर को नुकसान, हृदय संबंधी जोखिम तथा अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की आशंका बढ़ सकती है। कुछ प्रकार की दर्दनिवारक दवाओं के बार-बार उपयोग से शरीर उनकी आदत भी विकसित कर सकता है या दवा का असर कम महसूस होने लग सकता है। इसलिए ऐसी दवाओं का सेवन हमेशा निर्धारित मात्रा और अवधि तक ही करना चाहिए।
दवा नहीं, कारण का करें इलाज
बार-बार दर्द होने पर केवल पेनकिलर लेना स्थायी समाधान नहीं है। पर्याप्त नींद, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, सही मुद्रा में बैठना और तनाव कम करना कई प्रकार के दर्द से बचाव में मदद कर सकते हैं। यदि दर्द लगातार बना रहे या बार-बार लौटे, तो स्वयं दवा लेने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना बेहतर है। सही कारण का पता लगाकर उपचार कराने से अनावश्यक दवाओं से बचा जा सकता है और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम भी कम होता है।
