वेरीकोसील को न करें नजरअंदाज, समय पर उपचार से बच सकती है निःसंतानता की समस्या

Dayanand Roy
3 Min Read
वेरीकोसील एंबोलाइजेशन

हमारे समाज में आज भी कई पुरुष निजी अंगों से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में खुलकर बात करने से हिचकिचाते हैं। ऐसी ही एक समस्या है वेरीकोसील, जो वृषण (टेस्टिकल्स) और स्क्रोटम यानी अंडकोष की थैली की नसों से जुड़ी होती है। इस स्थिति में नसों में सूजन आ जाती है, जिससे दर्द और असहजता महसूस हो सकती है। समय रहते इसका इलाज न होने पर यह पुरुषों में निःसंतानता का कारण भी बन सकती है।

 क्या है वेरीकोसील और कैसे बढ़ती है समस्या?

वेरीकोसील आमतौर पर 15 से 40 वर्ष की आयु के पुरुषों में अधिक देखने को मिलती है। सामान्य रूप से नसों में मौजूद वॉल्व रक्त को टेस्टिकल्स और स्क्रोटम से हृदय की ओर पहुंचाने का काम करते हैं। जब ये वॉल्व ठीक से काम नहीं करते, तो रक्त नसों में जमा होने लगता है। इससे नसें फूल जाती हैं और धीरे-धीरे शुक्राणुओं के निर्माण तथा उनकी गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यही स्थिति आगे चलकर निःसंतानता की वजह बन सकती है।

लक्षणों को पहचानना है जरूरी

वेरीकोसील के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। कई लोगों को अंडकोष में दर्द या भारीपन महसूस होता है, जबकि कुछ मरीजों को लंबे समय तक खड़े रहने, दौड़ने, जिम करने, भारी वजन उठाने या लंबी यात्रा के बाद परेशानी बढ़ जाती है। कई युवा फिजिकल फिटनेस टेस्ट के दौरान भी इस समस्या के कारण प्रभावित होते हैं।

एंबोलाइजेशन बना आधुनिक और प्रभावी इलाज

विशेषज्ञों के अनुसार, वेरीकोसील का स्थायी समाधान केवल दवाओं से संभव नहीं है। वेरीकोसील एंबोलाइजेशन एक आधुनिक और प्रभावी उपचार पद्धति है, जिसमें बिना चीरफाड़ के कैथेटर के माध्यम से प्रभावित नसों तक पहुंचकर उन्हें विशेष ग्लू या अन्य सामग्री से बंद किया जाता है। यह प्रक्रिया लोकल एनेस्थीसिया में की जाती है और मरीज पूरी तरह जागृत रहता है।

उपचार के कई महत्वपूर्ण फायदे

एंबोलाइजेशन में न तो बड़ा चीरा लगाया जाता है और न ही शरीर पर कोई स्थायी निशान पड़ता है। प्रक्रिया लगभग दर्दरहित होती है और मरीज उसी दिन अस्पताल से घर जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे 90 से 100 प्रतिशत मरीजों को दर्द से राहत मिलती है, जबकि 50 से 70 प्रतिशत मामलों में शुक्राणु उत्पादन में सुधार देखा जाता है। यही वजह है कि यह तकनीक वेरीकोसील के इलाज में तेजी से लोकप्रिय हो रही है।

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