
असम : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रविवार को कहा कि झारखंड एक ऐसा प्रदेश है, जहां जब लोग आजादी का सपना नहीं देखते थे, उससे पहले से हमारे पूर्वज शोषकों के विरुद्ध संघर्ष करते थे।

वे असम के तिनसुकिया में ऑल आदिवासी स्टूडेंट्स एसोसिएशन ऑफ़ आसाम (AASAA) की ओर से आयोजित आदिवासी महासभा में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।

उन्होंने कहा कि बाबा तिलका मांझी, बिरसा मुंडा, सिदो-कान्हु, फूलो-झानो ने हमारी पीढ़ियों को बचाने के लिए, जल, जंगल, जमीन को बचाने के लिए अपना बलिदान दिया था।
उन्होंने कहा कि सबसे पहले आदिवासी समाज ने ही अंग्रेजों से लोहा लिया था? क्योंकि आदिवासी समाज ने हमेशा अपने हक और अधिकार के लिए संघर्ष किया।
क्या कारण रहा कि देश का मूलवासी अलग-अलग जगह बिखर कर रहने को मजबूर हो गया? देश आज़ाद हुए कई साल हो गए, हमें संविधान में रक्षा कवच मिला, लेकिन हम कहां हैं?
आज हम आगे बढ़ रहे हैं। आदिवासी समाज शोषित और वंचित समाज आगे बढ़ रहा है। दिशोम गुरु शिबू सोरेन आज हमारे बीच नहीं हैं पर जब उन्होंने अलग राज्य की कल्पना की थी तो कुछ लोग मजाक उड़ाते थे। आज सच्चाई पूरे देश के सामने हैं, वर्ष 2000 में हमें अपना झारखंड राज्य मिला। इस मौके पर उन्होंने जुबिन गर्ग को श्रद्धांजलि अर्पित की।



