नीति आयोग में झारखंड की जोरदार पैरवी, CM हेमंत सोरेन ने केंद्र से मांगे 1.36 लाख करोड़ और 6,000 करोड़ रुपये

नीति आयोग की बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड के विकास के लिए केंद्र से 1.36 लाख करोड़ रुपये बकाया और जल जीवन मिशन के 6,000 करोड़ रुपये जारी करने की मांग की।

Dayanand Roy
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NITI Aayog Meeting : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने नीति आयोग की 11वीं शासी परिषद की बैठक में झारखंड के विकास का व्यापक विजन प्रस्तुत करते हुए केंद्र सरकार से शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, सिंचाई, खनन और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में विशेष सहयोग की मांग की। उन्होंने कहा कि झारखंड केवल खनिज संपदा का भंडार नहीं, बल्कि विकसित भारत-2047 के निर्माण में महत्वपूर्ण भागीदार बनने की क्षमता रखता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड ने देश की औद्योगिक प्रगति में कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट समेत विभिन्न खनिजों के माध्यम से महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसके बावजूद राज्य ने विस्थापन, नक्सलवाद और विकास संबंधी अनेक चुनौतियों का सामना किया है। उन्होंने कहा कि खनिज संसाधनों से प्राप्त लाभ को शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास से जोड़ना समय की आवश्यकता है।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से जल जीवन मिशन के तहत लंबित 6,000 करोड़ रुपये शीघ्र जारी करने की मांग की। इसके अलावा उन्होंने कोयला कंपनियों पर बकाया 1.36 लाख करोड़ रुपये का भुगतान सुनिश्चित करने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इन संसाधनों के उपलब्ध होने से राज्य में विकास योजनाओं को नई गति मिलेगी।

शिक्षा क्षेत्र का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य के 80 सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस बेहतर परिणाम दे रहे हैं और यहां से विद्यार्थी आईआईटी, मेडिकल तथा अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में चयनित हो रहे हैं। उन्होंने पीएम श्री विद्यालयों और केंद्रीय विद्यालयों की संख्या बढ़ाने की मांग भी केंद्र सरकार के समक्ष रखी।

आंगनबाड़ी व्यवस्था पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में 38 हजार आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, जिनमें से लगभग 15 हजार केंद्रों के पास अपना भवन नहीं है। इसके बावजूद पोषण अभियान और ‘सामार’ योजना के माध्यम से कुपोषण एवं स्टंटिंग की दर में कमी लाने में सफलता मिली है। राज्य सरकार अपने संसाधनों से 5 हजार नए आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण करा रही है।

युवाओं के कौशल विकास को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड हर वर्ष एक लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ रहा है। मुख्यमंत्री सारथी योजना के तहत अब तक 6.76 लाख युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जबकि बिरसा कौशल विकास योजना के तहत अधिकांश प्रखंडों में प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि एआई, इलेक्ट्रिक वाहन और रोबोटिक्स जैसे भविष्य के क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने पंचायत स्तर तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की दिशा में उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए बताया कि राज्य में 1,276 दवा दुकानें संचालित की जा रही हैं। साथ ही एआई आधारित डिजिटल स्टेट हेल्थ प्रोफाइल विकसित करने की दिशा में भी कार्य चल रहा है, जिससे गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान और उपचार संभव हो सकेगा।

खेल क्षेत्र में झारखंड की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हॉकी, फुटबॉल, एथलेटिक्स और तीरंदाजी में राज्य ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है। उन्होंने राज्य में स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी, हॉकी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और फुटबॉल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना के लिए केंद्र से सहयोग मांगा।

कृषि एवं जल संसाधन क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में 10 लाख से अधिक पोषण वाटिकाएं विकसित की गई हैं तथा बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत 1.5 लाख एकड़ भूमि पर फलदार पौधों का रोपण किया गया है। उन्होंने सिंचाई परियोजनाओं और ग्रामीण पेयजल योजनाओं के लिए भी अतिरिक्त केंद्रीय सहायता की आवश्यकता बताई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2047 तक झारखंड को केवल खनिज आधारित अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसे मैन्युफैक्चरिंग हब, ग्रीन इकोनॉमी और नॉलेज इकोनॉमी के रूप में विकसित करने का लक्ष्य है। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार के बीच मजबूत साझेदारी आवश्यक है।

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