आजकल स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग और डायबिटीज के मरीज अक्सर डाइजेस्टिव बिस्कुट को सामान्य बिस्कुट की तुलना में बेहतर विकल्प मानते हैं। चाय के साथ इन्हें हेल्दी स्नैक समझकर खाया जाता है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में उपलब्ध अधिकांश डाइजेस्टिव बिस्कुट भी अन्य सामान्य बिस्कुटों की तरह ही अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड होते हैं और इनका नियमित सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
किन चीजों से बनते हैं डाइजेस्टिव बिस्कुट?
अधिकांश डाइजेस्टिव बिस्कुट रिफाइंड फ्लोर (मैदा), रिफाइंड शुगर और अनहेल्दी वेजिटेबल ऑयल से तैयार किए जाते हैं। नाम भले ही “डाइजेस्टिव” हो, लेकिन ये पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में कोई विशेष मदद नहीं करते। इनमें फाइबर की मात्रा भी अपेक्षाकृत कम होती है, जिससे इन्हें हेल्दी फूड मानना सही नहीं है।
न्यूट्रिशन की सच्चाई
पोषण संबंधी आंकड़ों के अनुसार, मात्र दो डाइजेस्टिव बिस्कुट (करीब 30-40 ग्राम) में लगभग 140 से 180 कैलोरी, 20 ग्राम कार्बोहाइड्रेट और करीब 7 ग्राम फैट होता है। यानी 30 ग्राम बिस्कुट में लगभग 21 प्रतिशत फैट मौजूद होता है। वहीं, फाइबर और प्रोटीन की मात्रा केवल 2-2 ग्राम के आसपास होती है। यह दर्शाता है कि इनमें जरूरी पोषक तत्वों की तुलना में फैट और कार्ब्स अधिक होते हैं।
खरीदने से पहले लेबल जरूर पढ़ें
यदि आप वास्तव में हेल्दी स्नैक चुनना चाहते हैं, तो बिस्कुट खरीदने से पहले पैकेट के पीछे दिए गए इंग्रीडिएंट्स और न्यूट्रिशन लेबल को ध्यान से पढ़ें। रोजाना डाइजेस्टिव बिस्कुट का सेवन करना प्रोसेस्ड पैकेज्ड फूड खाने के समान हो सकता है, जो लंबे समय में मोटापा, हृदय रोग और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है। संतुलित और प्राकृतिक खाद्य पदार्थों को अपनी डाइट में प्राथमिकता देना अधिक लाभकारी होगा।
