अक्सर लोग गिरने या चोट लगने के बाद कुछ दिनों में दर्द कम होते ही उसे नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन कई मामलों में यही साधारण दिखने वाली चोट आगे चलकर गंभीर समस्या का रूप ले सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, कम उम्र में होने वाले कई कूल्हा प्रत्यारोपण (हिप रिप्लेसमेंट) के पीछे बचपन या युवावस्था में लगी पुरानी चोटें जिम्मेदार होती हैं। समय के साथ यह समस्या Avascular Necrosis के रूप में सामने आ सकती है।
क्या है एवैस्कुलर नेक्रोसिस?
एवैस्कुलर नेक्रोसिस का अर्थ है रक्त की पर्याप्त आपूर्ति न मिलने के कारण हड्डी के ऊतकों का धीरे-धीरे नष्ट होना। जब किसी चोट के कारण कूल्हे तक रक्त पहुंचाने वाली धमनियां क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, तो प्रभावित हिस्से को पर्याप्त रक्त नहीं मिल पाता। परिणामस्वरूप वहां की कोशिकाएं कमजोर होने लगती हैं और समय के साथ हड्डी को नुकसान पहुंच सकता है।
कैसे शुरू होती है परेशानी?
शुरुआती चरण में मरीज को चलने या वजन डालने पर हल्का दर्द महसूस हो सकता है। कई लोग इसे सामान्य दर्द समझकर अनदेखा कर देते हैं। लेकिन धीरे-धीरे दर्द बढ़ने लगता है और चलने का तरीका भी बदल सकता है। समय पर उपचार न मिलने पर स्थिति गंभीर हो सकती है।
जांच और उपचार क्यों जरूरी है?
यदि कूल्हे में चोट लगी हो, तो डॉक्टर की सलाह पर एमआरआई जैसी जांच करवाना महत्वपूर्ण हो सकता है। इससे यह पता लगाया जा सकता है कि रक्त वाहिकाओं को कितनी क्षति पहुंची है। एवैस्कुलर नेक्रोसिस के कई मामलों में सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, उपचार की सफलता में सही इम्प्लांट और समय पर हस्तक्षेप की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
