Hemant Soren : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग तथा योजना एवं विकास विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को राज्य के युवाओं के लिए अधिक रोजगार और स्वरोजगार के अवसर सृजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों तक सरकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ पहुंचना चाहिए और पलायन रोकने के लिए प्रभावी रणनीति तैयार की जानी चाहिए।
झारखंड मंत्रालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने रोजगार सृजन, कौशल विकास, नियोजन सेवाओं और श्रमिक कल्याण योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने कहा कि विभागीय योजनाओं का क्रियान्वयन समयबद्ध और परिणामोन्मुख होना चाहिए, क्योंकि श्रम विभाग राज्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
मुख्यमंत्री ने असंगठित, निर्माण और प्रवासी श्रमिकों का अद्यतन डाटा तैयार करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि अगले तीन महीनों के भीतर यह स्पष्ट जानकारी पोर्टल पर उपलब्ध हो कि राज्य के कितने श्रमिक देश के विभिन्न हिस्सों में कार्यरत हैं। साथ ही ई-श्रम पोर्टल पर अधिक से अधिक श्रमिकों का पंजीकरण सुनिश्चित कर उन्हें सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ा जाए।
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि ‘झारखंड राज्य प्रवासी सुलभ सहायता योजना’ के तहत नोएडा, हैदराबाद, चेन्नई, बेंगलुरु और मुंबई में सहायता केंद्र स्थापित किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने प्रवासी श्रमिकों की नियमित मैपिंग और लोकेशन अपडेट करने के निर्देश दिए, ताकि आवश्यकता पड़ने पर उन्हें तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
उन्होंने श्रमिक पंजीकरण अभियान को और तेज करने, गांव-गांव विशेष शिविर लगाने तथा मनरेगा मजदूरों को भी इस अभियान से जोड़ने को कहा। इसके साथ ही निर्माण स्थलों पर हेलमेट, सुरक्षा जूते और ग्लव्स जैसे सुरक्षा उपकरणों के उपयोग को अनिवार्य बनाने और सुरक्षा मानकों के कड़ाई से पालन पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड को केवल श्रमिक आपूर्ति करने वाला राज्य नहीं, बल्कि रोजगार सृजन में आत्मनिर्भर राज्य बनाना होगा। इसके लिए आईटीआई संस्थानों के आधुनिकीकरण, नए रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों की शुरुआत, स्मार्ट क्लासरूम और बेहतर प्लेसमेंट व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित युवाओं को राज्य के भीतर ही बेहतर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।
