Palamu News : पलामू समाहरणालय में आयोजित जन समाधान दिवस के दौरान एक बेहद भावुक मामला सामने आया। आर्थिक तंगी और जीवन की कठिन परिस्थितियों से जूझ रही एक विधवा मां अपने डेढ़ वर्षीय बेटे को अनाथालय भेजने की गुहार लेकर प्रशासन के पास पहुंची थी। लेकिन जिला प्रशासन की संवेदनशील पहल ने मां-बेटे को अलग होने से बचा लिया।
पति की मौत के बाद बढ़ी मुश्किलें
जन समाधान दिवस में पहुंची महिला ने उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत को बताया कि कम उम्र में ही उसके पति का निधन हो गया। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो गई कि डेढ़ साल के बच्चे का पालन-पोषण करना मुश्किल हो रहा है।
महिला ने मजबूरी में बच्चे को किसी अनाथ आश्रम में भेजने का विचार किया था, ताकि उसका भविष्य सुरक्षित रह सके।
DC ने कहा- बच्चे से अलग होने की जरूरत नहीं
महिला की आपबीती सुनकर उपायुक्त भावुक हो गए। उन्होंने महिला को भरोसा दिलाया कि प्रशासन उसके साथ खड़ा है और उसे अपने बच्चे से अलग होने की कोई जरूरत नहीं है।
उपायुक्त ने मौके पर ही अधिकारियों को निर्देश देते हुए महिला को विधवा पेंशन योजना से जोड़ने का आदेश दिया। इसके तहत महिला को प्रतिमाह 1,000 रुपये की सहायता मिलेगी।
बच्चे के लिए हर महीने 4 हजार रुपये की मदद
इसके अलावा प्रशासन ने बच्चे को स्पॉन्सरशिप योजना से जोड़ते हुए उसके भरण-पोषण के लिए 4,000 रुपये प्रतिमाह आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का निर्णय लिया। इस तरह मां-बेटे को कुल 5,000 रुपये मासिक सहायता मिलेगी।
उपायुक्त ने महिला को आत्मनिर्भर बनने के लिए छोटा रोजगार शुरू करने की सलाह भी दी, ताकि वह भविष्य में अपने परिवार को बेहतर ढंग से संभाल सके।
जन समाधान दिवस में सुनी गईं कई समस्याएं
जन समाधान दिवस के दौरान भूमि विवाद, दाखिल-खारिज, पीएम आवास, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और कल्याण विभाग से जुड़े कई मामलों की भी सुनवाई की गई। हालांकि एक मां और उसके मासूम बच्चे की यह कहानी पूरे कार्यक्रम की सबसे भावुक और मानवीय तस्वीर बनकर सामने आई।
