झारखंड सोने की चिड़िया तब बनेगा जब यहां की साढ़े तीन करोड़ जनता के चेहरे पर मुस्कान होगी : हेमंत सोरेन

Dayanand Roy
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जनता को आर्थिक, शैक्षणिक और सामाजिक रूप से सशक्त करने में जुटी है सरकार

रांची : झारखंड को सोने की चिड़िया कहा जाता है लेकिन यह सोने की चिड़िया तभी बनेगा जब यहां के साढ़े तीन करोड़ लोगों के चेहरे पर मुस्कान होगी। इसमें सबसे बड़ी भूमिका हमारी विधायिका की है। यहां बैठने वाले विधायकों को जनता चुनकर भेजती है। विधायक कितनी सकारात्मक भूमिका में लोगों के बीच में रहते हैं यह मायने रखता है। शनिवार को ये बातें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहीं। 

वे झारखंड विधानसभा के रजत जयंती समारोह के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने लोगों को आर्थिक, शैक्षणिक और सामाजिक रूप से मजबूत करने का संकल्प लिया है और उसी का परिणाम है कि गांव-गांव, शहर-शहर, इस राज्य की आधी आबादी को अपने पैरों पर खड़ा करने में सरकार जुटी है।

सीएम हेमंत ने कहा कि यहां के लोगों ने अपना राज्य और अलग प्रांत बनाने का निर्णय लिया और दिशोम गुरु शिबू सोरेन  के नेतृत्व में एक लंबा संघर्ष हुआ। इस युवा राज्य को आशीर्वाद देने के लिए दिशोम गुरु शिबू सोरेन हम लोगों के बीच में नहीं है। कई ऐसे वीर पुरुष है जो आज हम लोगों के बीच में नहीं है। मैं समझता हूं कि राज्य की परिकल्पना तो पूरी हुई लेकिन मूल विषय जहां आता है उस मूल विषय में हम सबसे निचले पायदान में खड़े हैं।

गरीबी, कुपोषण, पिछड़ापन, शिक्षा का अभाव, सामाजिक न्याय से वंचित कई ऐसी चीज हैं जो आज के दिन में भी, हम सभी लोगों को, इस राज्य के जनमानस को घेरे हुई हैं। आज के दिन में भी अगर हम तुलना करें किसी भी राज्य से तो आज इस राज्य में गरीबी का, शिक्षित लोगों का, सामाजिक रूप से मजबूत होने का, आर्थिक रूप से मजबूत होने का दावा बहुत मजबूती से किया जाए यह सही नहीं है।

इसलिए हम सब का दायित्व बनता है, इस देश का लोकतंत्र, इस देश का संविधान, इस देश का कानून, व्यक्ति विशेष के लिए नहीं बल्कि हर व्यक्ति के लिए है। लेकिन आज कानून की जानकारी किसके पास है?

यही वजह है लोग अपने-अपने तरीके से, अपने हक-अधिकार की मांग को लेकर रास्ते अपनाते हैं।

हमने राज्य में उत्कृष्ट विद्यालय खोलते हुए बेहतर शिक्षा देने का प्रयास किया है। इस 25 वें वर्षगांठ में सेवा का अधिकार जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम का शुभारंभ किया है। मुझे लगता है कि इस राज्य के इतिहास का यह पहला चरण होगा जहां हम राज्य के पदाधिकारी को, राज्य की नीतियों को, कानून को, आम जनों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि आज ऐसे कई कानूनों का प्रावधान है और उसमें कई ऐसे बिंदु जोड़े गए हैं जहां एक सीमित सीमा के अंदर उस संबंधित कार्य को करना अनिवार्य है। अगर वह कार्य नहीं होगा तो संबंधित पदाधिकारी को दंड भी देने का प्रावधान है।

यह विषय हम गांव-गांव तक पहुंचाने में लगे हैं ताकि आने वाले समय में गांव के लोग भी जागरूक हो और हमारे कार्यपालिका की व्यवस्था को भी पता चले कि हमारा अपना दायरा क्या है और हमें कौन सा काम कितने समय में पूरा करना है।

यह सुनने में छोटा सा प्रयास है लेकिन इसका असर मील का पत्थर साबित होगा। आज जिस तरह से लोग विभिन्न प्रकार के प्रमाण पत्र के लिए धक्के खाते हैं, इन सबको एक समय सीमा के अंदर करना होता है, लेकिन ना इसकी समय सीमा की जानकारी किसी के पास है और ना कोई किसी को इसकी जानकारी देता है। पर हमारी सरकार इस संबंध में जनता को जागरूक करने में जुटी है।

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