बिहार चुनाव में बागी बिगाड़ सकते हैं अधिकृत उम्मीदवारों का गणित

Dayanand Roy
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दोनों गठबंधनों के करीब चार दर्जन सीटों पर बागी डटे हैं चुनावी मैदान में

महेश कुमार सिन्हा

पटना : बिहार विधानसभा चुनाव के लिए पहले चरण के मतदान में अब सिर्फ एक सप्ताह का समय बचा है। पहले चरण में राज्य के 18 जिलों की 121 सीटों पर 6 नवंबर को मतदान होना है। तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है,सूबे का सियासी पारा चढ़ता जा रहा है। एनडीए और महागठबंधन जहां चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंक रही है, वहीं दोनों गठबंधनों के भीतर बगावत  भी अब खुलकर सामने आ गई है।

बगावत की आंधी ने सियासी दलों के अधिकृत उम्मीदवारों की करीब चार दर्जन सीटों पर नींद हराम कर दी है। बागियों को मनाने का दौर भी जारी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कई नाराज भाजपा नेताओं को मना लिया। बावजूद भाजपा को भी कई सीटों पर बागियों से जूझना पड़ रहा है। जदयू, राजद, कांग्रेस और हम के भी अनेक बागी अखाड़े में इन पार्टियों के अधिकृत उम्मीदवारों को ललकार रहे हैं। संबंधित पार्टियां इन्हें मनाने में नाकाम होने पर निष्कासन का डंडा भी चला रही है। 

कितने बागी अपने दल का गणित बिगाड़ पाएंगे, यह कहना अभी जल्दीबाजी होगी। हालांकि, दल-बदलुओं के आने से चुनावी मुकाबला भी रोचक हो गया है। जो कार्यकर्ता बीते पांच सालों से चुनाव लड़ने के लिए मेहनत कर रहे थे ,वे टिकट नहीं दिए जाने से नाराज हैं। कहीं-कहीं वे बागी तेवर अपनाए हुए हैं तो कहीं भीतरघात की भूमिका में हैं। विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने पर सभी प्रमुख दलों के तपे-तपाए नेता अपने बल पर निर्दलीय चुनावी मैदान में कूद गए हैं।

इनमें से कुछ ऐसे नेता हैं, जिनकी क्षेत्र में अच्छी पकड़ भी है। वे लड़ाई को त्रिकोणीय बना रहे हैं। परिणाम कुछ भी हो सकता है।दल से बगावत कर निर्दलीय चुनावी मैदान में उतरे पहलवान किसी के लिए घातक तो विरोधियों के लिए वरदान साबित हो सकते हैं। कई दल के लड़ाके चुनावी अखाड़े में डटे हुए हैं। ऐसे नेताओं को छह साल तक के लिए निष्कासित किया गया है।

चेतावनी भी दी गई है कि बैनर का इस्तेमाल किया तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके चलते भाजपा ने चार नेताओं को पार्टी से निष्कासित कर दिया है।इनमें बहादुरगंज से विधानसभा चुनाव लड़ने वाले वरुण सिंह शामिल हैं। इसके अलावा, गोपालगंज से चुनाव लड़ रहे अनूप कुमार श्रीवास्तव भी निष्कासित किए गए हैं। भाजपा ने कहलगांव से चुनाव लड़ने वाले विधायक पवन यादव को भी पार्टी से निष्कासित कर दिया है। पवन यादव पर पार्टी के फैसले का उल्लंघन करने का आरोप है। बड़हरा से चुनाव लड़ने वाले सूर्य भान सिंह को भी पार्टी से 6 साल के लिए बाहर कर दिया गया है।

उधर राजद ने 27 बागियों को दल से निष्कासित किया है। इसमें एक विधायक छोटे लाल राय जदयू के टिकट पर परसा से चुनाव लड़ रहे हैं। जबकि तीन नेताओं ने भाजपा का दामन थाम लिया है। विधायक मो. कामरान गोविंदपुर से निर्दलीय चुनावी मैदान में हैं। वहीं महिला राजद की प्रदेश अध्यक्ष रितू जायसवाल- परिहार से, सरोज यादव- बड़हरा से, राजीव रंजन उर्फ पिंकु भइया- जगदीशपुर से, अनिल यादव- नरपतगंज से, अक्षय लाल यादव- चिरैया से, रामसखा महतो- चेरिया बरियारपुर से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं भगत यादव- शेरघाटी से, मुकेश यादव- संदेश से, संजय राय- महनार से, कुमार गौरव और राजीव कुशवाहा- दरभंगा से, महेश प्रसाद गुप्ता-जाले से, पूनम देवी गुप्ता- मोतिहारी से, सुरेन्द्र प्रसाद यादव- सोनपुर से निर्दलीय चुनावी मैदान में हैं। डॉ. राम प्रकाश महतो- कटिहार से, प्रणव प्रकाश- मधेपुरा से, अफजल अली- गौड़ाबौराम से चुनाव लड़ रहे हैं।

वहीं, हम पार्टी ने दल और एनडीए प्रत्याशियों के खिलाफ काम कर रहे 11 नेताओं को पार्टी से निष्कासित किया है। इन नेताओं में छह नेता बतौर निर्दलीय प्रत्याशी बनकर चुनावी मैदान में हैं। इसमें राजेश रंजन- घोसी से, रितेश कुमार उर्फ चुन्नू शर्मा- जहानाबाद से, नंदलाल मांझी- बोधगया से, चंदन ठाकुर- समस्तीपुर से, बीके सिंह- मैरवा से और राजेन्द्र यादव -कसबा से निर्दलीय चुनावी मैदान में डटे हैं। लोजपा आर के रविशंकर प्रसाद अशोक- सूर्यगढ़ा से निर्दलीय चुनावी मैदान में हैं।

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