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कांग्रेस की बिहार में 76 सीटों पर लड़ने की तैयारी

by Dayanand Roy

महेश सिन्हा

36 सीटों पर उम्मीदवारों की जल्द हो सकती है घोषणा

पटना : कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ में धटक दलों के बीच अभी सीटों का बंटवारा नहीं हुआ है। लेकिन कांग्रेस ने उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया शुरु कर दी है।

पार्टी की केन्द्रीय चुनाव समिति (सी.इ.सी) की शुक्रवार को दिल्ली में हुई बैठक में कांग्रेस ने बिहार विधान सभा की 36 सीटों पर तीन-तीन उम्मीदवारों का पैनल भी तय कर दिया है।इनमें 32 वे सीटें हैं जिन पर पिछले चुनाव  में भी कांग्रेस  लड़ी थी।

जबकि चार  वैसी सीटें हैं जो 2020 के विधान सभा चुनाव में सहयोगी दलों के पास थीं। पार्टी सूत्रों के अनुसार उम्मीदवारों का पैनल  कांग्रेस हाई कमान को सौंप  दिया गया है। सूत्रों की माने तो 24 सितंबर को पटना में होने वाली कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक के बाद 36 उम्मीदवारों की सूची जारी की जा सकती है।

मालूम हो कि आजादी के बाद पहली बार कांग्रेस की विस्तारित कार्य समिति की बैठक  24 सितंबर को पटना के सदाकत आश्रम में होने जा रही है। इस बैठक का मुख्य एजेंडा बिहार विधान सभाचुनाव है।इससे पूर्व  गुरुवार  को पटना में हुई प्रदेश चुनाव समिति की बैठक में 76 सीटों को चिन्हित कर उस पर चर्चा हुई थी। साथ ही उम्मीदवारों के चयन के लिए कांग्रेस हाई कमान को  अधिकृत करने का प्रस्ताव पारित किया गया था।

इस बीच चुनाव से पहले महागठबंधन में सीट बंटवारे और मुख्यमंत्री पद के चेहरे को लेकर खींचतान तेज हो गई है। कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि तेजस्वी यादव को फिलहाल मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित नहीं किया जाएगा। इसका फैसला बिहार की जनता करेगी।

पार्टी के इस रुख से राजद की नाराजगी की खबरें सामने आ रही हैं। उधर, कांग्रेस का दावा है कि राहुल गांधी की ‘मतदाता अधिकार यात्रा’ से बिहार में उसका जनाधार मजबूत हुआ है। इसी वजह से पार्टी अब सीटों के साथ-साथ उपमुख्यमंत्री पद की भी मांग कर रही है। इधर, कांग्रेस की इस बढ़ती सक्रियता के बीच तेजस्वी यादव ‘बिहार अधिकार यात्रा’ पर निकल गए, जिसे कांग्रेस की रणनीति का जवाब माना जा रहा है।

कांग्रेस चाहती है कि सीट बंटवारे में ‘अच्छी’ और ‘खराब’ सीटों का संतुलन हो। कांग्रेस सूत्रों की मानें तो कुटुंबा विधानसभा सीट को लेकर राजद और कांग्रेस में तकरार है। पूर्व मंत्री सुरेश पासवान का चेहरा राजद ने कुटुंबा विधानसभा सीट से आगे किया है। राजद के रवैये से कांग्रेस में नाराजगी है। कांगेस का मानना है कि जानबूझकर सुरेश पासवान को आगे किया जा रहा है।

जबकि सात बार से कुटुंबा विधानसभा सीट पर राजेश राम और उनके पिता का दबदबा रहा है। ऐसे में कांग्रेस के लोगों का कहना है कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस राजद की मोहताज नहीं।कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि राजद कुटुंबा विधानसभा क्षेत्र को लेकर प्रेशर पॉलिटिक्स कर रही है। राजेश राम को उपमुख्यमंत्री का चेहरा सामने नहीं लाने को लेकर पॉलिटिक्स हो रही है।

सूत्रों के मुताबिक बदली हुई और बेहतर परिस्थितियों में कांग्रेस इस बार विधानसभा चुनाव लड़ रही है।  2020 में जीती गई 19 सीटें और वे सीटें जहां पार्टी 5 हजार वोटों से हारी थी उसे मिलनी चाहिए। कुल मिलाकर कांग्रेस इस बार   76 सीटों पर दावा ठोक रही है। राजद की बात करें तो राजद 2020 में 144 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 75 सीट जीती था। अब भी करीब 90 सीटों पर राजद की पकड़ अच्छी है।

वहीं, सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस ने राहुल गांधी की मतदाता अधिकार यात्रा के बाद 76 सीटों को चिन्हित कर लिया है। माना जा रहा है कि 24 सितंबर को  होने वाली कांग्रेस वर्किंग कमेटी(सीडब्ल्यूसी) की बैठक में इस पर मुहर लग सकती है। पटना में सीडब्ल्यूसी की बैठक का होना इस बात का संकेत है कि राहुल गांधी कांग्रेस को अपने पैरों पर खड़ा करना चाहते हैं।

इस बैठक से साफ़ है कि कांग्रेस इसबार सीट शेयरिंग में कोई समझौता करने के मूड में नहीं है। सियासत के जानकारों का मानना है कि राहुल गांधी ने पहले यात्रा कर राजद पर दबाव बनाया और अब सीडब्ल्यूसी की बैठक पटना में कराने का फैसला लेकर ये साफ कर दिया है कि अब वह राजद के पिछलग्गू वाली से बाहर निकल कर  अपना खोया हुआ जनाधार वापस पाना चाहती है।

दरअसल, कांग्रेस राहुल गांधी की मतदाता अधिकार यात्रा से उत्साहित है। राहुल गांधी की यात्रा में जिस तरह से भीड़ उमड़ी, उससे कांग्रेस को लग रहा है कि उसकी पकड़ मजबूत हुई है। यही वजह है कि कांग्रेस अभी अपनी ताकत दिखा रही है। वह यह बताना चाहती है कि वह राजद की पिछलग्गू पार्टी नहीं है। हालांकि, दोनों खेमों का कहना है कि अभी सीट शेयरिंग पर बातचीत जारी है।

हालांकि कांग्रेस की इस चाल से राजद में खलबली जरूर है। इससे पहले तेजस्वी यादव ने कहा था कि वे सभी 243 सीटों पर लड़ सकते हैं। मगर अब कांग्रेस ने अधिक सीटें मांग कर मामले को और उलझा दिया है। इधर राजद खेमे का कहना है कि कांग्रेस को 70 सीटों पर ही संतोष करना होगा। राजद पिछली बार से अधिक सीटें देने के पक्ष में नहीं है। इसकी वजह है कि 2020 में कांग्रेस ने 70 सीटों पर चुनाव लड़ा तो था मगर सीटें केवल 19 ही जीत पाई थी।

लेखक न्यूजवाणी बिहार के संपादक हैं।

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