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विधानभा चुनाव से पहले विधायकों की नाराजगी से जूझ रहा है राजद

by Dayanand Roy

पार्टी के कई और विधायक पाला बदलने के फिराक में

महेश कुमार सिन्हा

पटना : राजद नेता तेजस्वी यादव भले ही बिहार विधानसभा चुनाव मे महागठबंधन की जीत और खुद मुख्यमंत्री बनने का दावा कर  रहे हों।लेकिन हकीकत यह है कि तेजस्वी यादव की पार्टी राजद में ही सबकुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है। हाल यह है कि लालू यादव के करिश्मा के बल पर चुनाव जीतने वाले कई विधायक पाला बदल के फिराक में हैं।

राजद के आठ विधायक पहले ही पार्टी से नाता तोड़ चुके हैं। इनमें बाहुबली नेता आनंद मोहन के बेटे चेतन आनंद, अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी, प्रहलाद यादव,  राजद के बाहुबली नेता एवं पूर्व विधायक राजवल्लभ यादव की पत्नी विभा देवी शामिल हैं। ये सभी अपने-अपने क्षेत्र में तेजस्वी यादव  को चुनौती दे रहे हैं।इन विधायकों के बगावत से राजद को नुकसान होना तय माना जा रहा है।

राजद कई विधायकों की नाराजगी चल ही रही थी कि इस बीच सड़क लालू यादव ने अपने बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को पार्टी और परिवार  से बाहर निकाल दिया। दरअसल  तेजप्रताप ने  सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए अपनी नई रिलेशनशिप का ऐलान किया था।

इसी के बाद  लालू यादव ने तेजप्रताप के खिलाफ कार्रवाई की था। तेज प्रताप यादव फिलहाल हसनपुर से राजद के विधायक हैं। लेकिन अब वह वह महुआ से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। जब पार्टी से निकल दिया गया है तो जाहिर है टिकट राजद नहीं देगी।  महुआ से राजद के मुकेश रौशन विधायक हैं।

इसबीच चुनाव नजदीक आते-आते तेज प्रताप के तेवर परिवार के प्रति कड़े होते जा रहे हैं। पिछले दिनों जहानाबाद में एक कार्यक्रम के दौरान तेजस्वी के समर्थन में नारे लगाने पर वह भड़क गए थे। उनके कार्यक्रम में एक युवक ने नारा लगा दिया था कि ‘अबकी बार तेजस्वी सरकार’…इतना सुनते ही तेज प्रताप ने कहा कि यहां फालतू बात मत करो। किसी व्यक्ति विशेष की सरकार नहीं आती है, जो घमंड करेगा, वो जल्दी गिरेगा और अगर नौटंकी करोगे तो रोजगार नहीं मिलेगा।

उधर 22 अगस्त को गयाजी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंच पर नवादा से राजद विधायक विभा देवी और रजौली से राजद विधायक प्रकाश वीर दिखे थे। चर्चा है कि दोनों विधानसभा का चुनाव राजद के टिकट पर नहीं लड़ेंगे। हालांकि आधिकारिक तौर पर उन्होंने अब तक पार्टी से इस्तीफा नहीं दिया है। 2020 विधानसभा चुनाव में लालू यादव के खास रहे बाहुबली राजबल्लभ यादव की पत्नी विभा देवी ने निर्दलीय श्रवण कुमार को हराया था। तीसरे स्थान पर जदयू के कौशल यादव थे। कौशल यादव अब राजद में शामिल हो गए हैं। 

नवादा की राजनीति में कौशल यादव और राज बल्लभ यादव एक-दूसरे के विरोधी हैं। बता दें कि राजबल्लभ यादव परिवार 1990 से ही नवादा में एक शक्ति का केंद्र रहा है। राज बल्लभ 1995 में पहली बार निर्दलीय विधायक चुने गए थे। 2000 में राजद के टिकट पर चुनाव जीते तो श्रम मंत्री बनाए गए थे। इसके बाद 2015 में जदयू-राजद और कांग्रेस के महागठबंधन से राजबल्लभ एक बार फिर चुनाव जीते, लेकिन फरवरी 2016 में नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उन पर प्राथमिकी दर्ज हुई। विशेष न्यायालय ने 21 दिसंबर, 2018 को दोषी करार दिया दे दिया।

तब उनकी विधानसभा की सदस्यता रद्द हो गई। इस सीट पर 2019 में विधानसभा उपचुनाव कराया गया. उपचुनाव में जदयू के कौशल यादव जीत गए। लेकिन 2020 विधानसभा चुनाव में राजबल्लभ की पत्नी विभा लड़ीं और जीत गई।

वहीं, रजौली से प्रकाश वीर राजद के टिकट पर लगातार दो बार से जीत रहे हैं। प्रकाश वीर चौधरी पासी समुदाय से आते हैं। प्रकाश वीर, राज बल्लभ यादव के करीबी माने जाते हैं। बताया जाता है कि वही उन्हें टिकट दिलवाते हैं और जिताते हैं। अब जबकि राज बल्लभ परिवार राजद से दूर जा रहा है तो प्रकाश वीर की राह भी मुश्किल हो गया है।

 लखीसराय के सूर्यगढ़ा से विधायक प्रहलाद यादव राजद के संस्थापक सदस्यों में रहे  हैं। 1995 से लगातार चुनाव जीत रहे हैं। दबंग और बाहुबली छवि के प्रहलाद यादव ने फरवरी 2024 में नीतीश सरकार के विश्वासमत के दौरान राजद से अलग लाइन लिया और सरकार के पाले में चले गए। प्रह्लाद यादव उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा के करीबी माने जाते हैं। वह कह चुके हैं कि मेरी कुर्बानी को तवज्जो दी जानी चाहिए। विजय सिन्हा के कहने पर ही मैं एनडीए के साथ आया था। प्रह्लाद यादव हमेशा लालू परिवार के साथ रहे। लंबे समय तक वह राजद के लखीसराय  जिलाध्यक्ष भी थे। वह इलाके में काफी प्रभावशाली माने जाने जाते हैं। प्रहलाद यादव का बालू का बड़ा कारोबार है।

बालू के पैसे से ही उनकी पूरी राजनीति चलती है। वहीं, शिवहर से राजद विधायक चेतन आनंद भी फरवरी 2024 में नीतीश सरकार के विश्वासमत के दौरान ही पाला बदल लिया था। वह राजद की जगह जदयू के साथ हो गए थे। हालांकि, चेतन आनंद ने अब तक आधिकारिक तौर पर राजद से इस्तीफा नहीं दिया है। अभी उनकी मां लवली आनंद शिवहर से जदयू की सांसद हैं। चेतन आनंद बाहुबली पूर्व सांसद आनंद मोहन के बड़े बेटे हैं। वह भी शिवहर से सांसद रह चुके हैं। वहीं, बाहुबली पूर्व विधायक अनंत सिंह की राह भी राजद से अलग हो गई है।

उनकी पत्नी और विधायक नीलम देवी जदयू की तरफ हो गई हैं। फरवरी 2024 में नीतीश सरकार के विश्वासमत के दौरान राजद से किनारा करने वाली चौथी विधायक संगीता कुमारी थीं। वह ऐन मौके पर भाजपा की तरफ चली गई थी। तब उन्होंने कहा था कि मुझे लगा कि कहीं न कहीं पार्टी (राजद) में दलितों का सम्मान नहीं हो रहा था। इसलिए हमने यह निर्णय लिया। कहा जाता है कि राजद के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह की करीबी होने की वजह से संगीता कुमार को मोहनिया से टिकट दिया गया था। वह मूल रूप से कैमूर की रहने वाली हैं।

2020 विधानसभा चुनाव में संगीता ने भाजपा के निरंजन राम को हराया था। सूचना है कि निरंजन राम राजद के संपर्क में हैं और विधानसभा चुनाव में उन्हें टिकट मिल सकता है। वहीं, भभुआ से राजद विधायक भरत बिंद भाजपा के संपर्क में हैं। उन्होंने 2020 विधानसभा चुनाव में भाजपा की रिंकी रानी पांडेय को हराया था। भभुआ विधानसभा सीट में कोयरी और कुर्मी मतदाता अधिक हैं। सवर्णेों में ब्राह्मण और कायस्थ अधिक हैं। उधर, महनार से बाहुबली नेता रामा सिंह की पत्नी वीणा सिंह राजद से विधायक हैं। 2020 में रामा सिंह की एंट्री जब राजद में हुई थी तो रघुवंश प्रसाद सिंह ने विरोध किया था। रघुवंश बाबू ने तब पार्टी से इस्तीफा तक दे दिया था।

रघुवंश बाबू का परवाह किए बिना वीणा सिंह को टिकट दिया गया था। उनके पति पूर्व सांसद रामा सिंह 2024 में राजद का साथ छोड़ चिराग पासवान वाली लोजपा(रा) में चले गए। महनार सीट पर लोजपा(रा) के टिकट पर रामा सिंह के खुद चुनाव लड़ने की चर्चा है। वैशाली में रामा सिंह की मजबूत पकड़ है। वह एरिया में राजपूतों के बड़े नेताओं में गिने जाते हैं। राजपूत वोट बैंक चुनावी दृष्टिकोण से अहम है।

माना जाता है कि रामा सिंह की पकड़ तेजस्वी यादव के राघोपुर विधानसभा सीट पर भी है। रामा सिंह 2024 लोकसभा चुनाव में वैशाली से टिकट चाहते थे। लेकिन नहीं मिला। वहां से पार्टी ने बाहुबली मुन्ना शुक्ला को टिकट दे दिया। इसके बाद रामा सिंह का पार्टी से मोह भंग हो गया। वहीं, सूत्रों की मानें तो राजद के कई और विधायक मौके की तलाश में हैं। उन्हें अब राजद में घुटन महसूस होने लगी है।

इसका कारण यह है कि तेजस्वी यादव की कार्यशैली किसी राजा की तरह है और वह किसी भी विधायक को तवज्जो नहीं देते हैं बल्कि उन्हें एक कर्मचारी की तरह  देखते हैं। ऐसे में कई विधायक अंदर से नाराज बताए जा रहे हैं। यही कारण है कि समय-समय पर जदयू और भाजपा के द्वारा राजद में टूट होने का भी दावा किया जाता रहा है।

लेखक न्यूजवाणी बिहार के संपादक हैं।

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