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वोट चोरी इस साल का बना सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा

by Dayanand Roy

 

एसआईआर को लेकर मचा बवाल

 

इसका बिहार चुनाव पर कोई असर नहीं पड़ा

 

पटना : बिहार की सियासत की नजर से बीत रहा यह साल कई मायनों में खास रहा। चुनावी साल होने के कारण  सियासी पारा लगातार चढ़ता रहा। पक्ष-विपक्ष की ओर से आरोप -प्रत्यारोप के दौरान मर्यादा की सीमायें टूट गईं। 2025 के विधान सभा चुनाव में विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ने वोट चोरी को सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाया।

भाजपा पर वोट चोरी करने का आरोप लगाया। चुनाव आयोग को भाजपा का प्रकोष्ठ बताया। सत्ताधारी एनडीए के नेताओं ने इसे सिर से खारिज कर दिया। इसे लेकर   दोनो पक्षों के बीच जोरदार जुबानी जंग हुई। इंडिया गठबंधन ने वोट चोरी के खिलाफ सघन अभियान चलाया। इसके तहत लोकसभा मे विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बिहार में “वोटर अधिकार यात्रा” निकाली।

इसमें राजद के तेजस्वी यादव सहित  इंडिया गठबंधन में शामिल सभी दलों के नेताओं ने शिरकत की। दरअसल वोट चोरी के मुद्दे के केंद्र में  मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर)था। चुनाव आयोग ने बिहार से ही एसआईआर की शुरुआत की । इसको लेकर खूब बवाल मचा।विपक्षी गठबंधन  ने इसे एनडीए का चुनाव जीतने का तरीका बताया।

उसका कहना था कि इसके जरिए विपक्षी पार्टियों के वोटरों के नाम  मतदाता सूची से काटे जा रहें है।जबकि सत्ता पक्ष ने इसे  खारिज करते हुए कहा कि मतदाता सूची में संशोधन जरुरी है। हालांकि, इन सब का बिहार विधानसभा चुनाव पर कोई असर  नहीं पड़ा। उल्टे चुनाव में एनडीए को प्रचंड बहुमत मिला। विधान सभा की 243 में से 202 सीटें एनडीए जीत ली।

इस चुनाव में मतदान ने सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए। बिहार में आजादी के बाद पहली बार 2025 के विधानसभा चुनाव में 67.13 प्रतिशत वोट पड़े। इस चुनाव में महिलाओं ने 71.6 प्रतिशत मतदान कर नया रिकॉर्ड बनाया।

महिलाओं ने पुरुषों के मुकाबले बढ़ चढ़कर मतदान में हिस्सा लिया। पुरुषों का मतदान प्रतिशत 62.8 रहा। इस चुनाव की खासियत यह भी रही कि चुनावी हिंसा के लिए बदनाम बिहार में हिंसा की एक भी घटना नहीं हुई।

एक भी बूथ पर दोबारा मतदान नहीं हुआ। यह भी एक रिकॉर्ड रहा। इस बार की चुनावी राजनीति दो ध्रुवीय रही। लेकिन जातिगत और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण कमजोर साबित हुआ। इसके बजाय राहत और वायदों के आधार पर  ध्रुवीकरण हुआ जिसमें सत्ता पक्ष आगे निकल गया। मतदाताओं ने बदलाव के बजाय राज्य के विकास की निरंतरता को कायम रखना उचित समझा। मतदान का यह रिकॉर्ड इसी का परिणाम माना जा रहा है।

2025 के विधानसभा चुनाव के बाद नीतीश कुमार दसवीं बार मुख्यमंत्री बने। यह भी एक रिकॉर्ड रहा और उनका नाम लंदन के ‘वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में शामिल हो गया। नीतीश कुमार के नाम बिहार में कार्यावधि के मामले में सबसे अधिक  दिनों तक  मुख्यमंत्री बने रहने का भी रिकॉर्ड है। 2025 के विधानसभा चुनाव मे एनडीए की प्रचंड जीत के साथ ही भाजपा 89 सीटें जीतकर पहली बार राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनी। बिहार की सियासत में 2025 की एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटना यह भी रही कि बांकीपुर के विधायक और बिहार सरकार के मंत्री रहे नितिन नवीन भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बने।

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