Home Don't Miss सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव : 20 हजार लोगों की उपस्थिति में ‘सनातन राष्ट्र संकल्प धर्मसभा’

सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव : 20 हजार लोगों की उपस्थिति में ‘सनातन राष्ट्र संकल्प धर्मसभा’

by News Vaani

फोंडा, गोवा: गोवा के फोंडा में आयोजित ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ में 20 हजार से अधिक लोगों ने भाग लिया। यह महोत्सव सनातन संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के 83वें जन्मोत्सव और संस्था के रजत जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में गोवा अभियांत्रिकी महाविद्यालय के मैदान पर हुआ। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण ‘सनातन राष्ट्र संकल्प धर्मसभा’ थी, जिसमें देश-विदेश से आए प्रमुख संत, विद्वान, तथा सामाजिक एवं धार्मिक नेतृत्वकर्ता शामिल हुए।

सनातन राष्ट्र संकल्प धर्मसभा में प्रमुख वक्ताओं का योगदान

पुज्य स्वामी गोविंद देवगिरी महाराज, श्रीरामजन्मभूमि तीर्थक्षेत्र न्यास के कोषाध्यक्ष, ने कहा कि केवल जप और साधना से देश की समस्याओं का समाधान नहीं होगा, बल्कि युद्ध स्तर पर अधर्म का सामना करना होगा। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद भी देश ने अधर्म को सहन किया है, और अब सनातन धर्म के संरक्षण के लिए कठोर प्रयासों की आवश्यकता है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना ने सनातन संस्कृति की रक्षा हेतु शक्ति की उपासना और जागृति की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि हिंदुओं को साहस और शौर्य के साथ धर्म की रक्षा करनी होगी और समाज में व्याप्त समस्याओं जैसे कि लव जिहाद, धर्मांतरण इत्यादि के विरुद्ध सख्त कदम उठाने होंगे।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी महाराज और अन्य धर्मगुरु भी सनातन धर्म की रक्षा और राष्ट्र की एकता के संदेश लेकर उपस्थित थे। सद्गुरु (डॉ.) चारुदत्त पिंगळे ने सभी से ‘सनातन राष्ट्र’ के लिए ‘धर्मदूत’ बनने का आह्वान किया।

सनातन धर्म व राष्ट्र के लिए आवश्यक जागृति

अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने जनसंख्या नियंत्रण कानूनों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश में अल्पसंख्यकों की संख्या बढ़ रही है और इस कारण हिंदू समुदाय को अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि वर्तमान कानूनों में संशोधन कर भारत को ‘सनातन राष्ट्र’ बनाने के लिए उचित कदम उठाने होंगे।

महंत राजू दास महाराज, अयोध्या स्थित सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी के महंत, ने कहा कि सनातन धर्म की रक्षा के लिए कट्टरता और दृढ़ संकल्प जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंदुत्व की रक्षा राष्ट्र की रक्षा है और सनातन धर्म विश्व कल्याण का मार्गदर्शक है।

सनातन संस्कृति की आध्यात्मिक और सामाजिक भूमिका

स्वामी बालकानंद गिरी महाराज ने धर्मसत्ता और राजसत्ता के सहयोग से ही ‘सनातन राष्ट्र’ की स्थापना संभव बताई। उन्होंने कहा कि अखाड़ों की सेना का इतिहास इसके उदाहरण हैं कि धर्म की रक्षा के लिए शक्ति का होना आवश्यक है।

सुरेश चव्हाणके ने सनातन संस्था के कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह संस्था धर्म और अध्यात्म के सच्चे प्रचार में अग्रणी है। उन्होंने सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव को विश्वरूप का दर्शन बताया।

स्वामी आनंद स्वरूप ने कहा कि सनातन संस्था के विचार हर हिंदू के मन में आएंगे तभी भारत हिंदू राष्ट्र बन सकेगा। उन्होंने साधु-संतों की शौर्यगाथाओं को जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता जताई।

धर्मस्थापनम् फाउंडेशन के पूज्य धर्मयशजी महाराज ने अगली पीढ़ी को रामायण और भगवद्गीता की शिक्षाओं से वंचित न रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म का संरक्षण ही देश की आत्मा की रक्षा है।

सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव के प्रमुख विषय और महत्व

‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ का उद्देश्य सनातन धर्म की गरिमा, उसकी सांस्कृतिक विरासत और धर्म रक्षा के लिए समाज में व्यापक जागरूकता फैलाना है। यह कार्यक्रम सनातन धर्म के प्रसार, भारतीय संस्कृति के संरक्षण तथा सामाजिक एकता के लिए एक मजबूत मंच प्रस्तुत करता है।

इस महोत्सव में धर्म-संरक्षण, सामाजिक न्याय, और राष्ट्रवादी चेतना से जुड़ी महत्वपूर्ण चर्चाएं हुईं। साथ ही, युद्ध कला प्रदर्शन एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों ने उपस्थित जनमानस को उत्साहित किया।

सनातन धर्म की समकालीन चुनौतियाँ और समाधान

आज के दौर में सनातन धर्म के सामने अनेक कानूनी, सामाजिक और सांस्कृतिक चुनौतियां हैं। ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ ने इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार करते हुए नए कानूनों की मांग की, जो देश में धार्मिक सहिष्णुता के साथ-साथ सनातन धर्म की रक्षा कर सकें।

धार्मिक और सामाजिक नेतृत्व ने जोर दिया कि केवल धार्मिक उपासना पर्याप्त नहीं, बल्कि सामाजिक सक्रियता और एकजुटता से ही सनातन धर्म को सशक्त किया जा सकता है। धर्म के प्रति कट्टरता और दृढ़ संकल्प से ही ‘सनातन राष्ट्र’ का सपना साकार होगा।

‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ की व्यापक पहुंच

इस महोत्सव में भारत के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ विदेशों से भी हिंदू समाज के अनेक गणमान्य सदस्य, संत, और आध्यात्मिक नेता उपस्थित रहे। उन्होंने सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार और राष्ट्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित किया।

कार्यक्रम का सीधा प्रसारण भी किया गया, जिससे पूरे देश में सनातन धर्म के संरक्षण की भावना को बल मिला। अधिक जानकारी और कार्यक्रम का लाइव प्रसारण ‘SanatanRashtraShankhnad.in’ पर उपलब्ध है।

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