
नेतरहाट गया तो एक प्रश्न भी मेरे साथ था। वो प्रश्न ये था कि मैग्नोलिया का प्रेमी कौन था? कौन था वो युवक जिसके साथ इतिहास में अन्याय हुआ और अब तक हो रहा है। क्या इसलिए कि वो आदिवासी था? क्या इसलिए कि वो एक आदिम जनजाति बिरजिया समुदाय का था। यह प्रश्न मुझे कई दिनों से झिंझोड़ रहा था पर इसका कोई आधिकारिक और प्रमाणिक उत्तर मेरे पास नहीं था।

बीते दिनों नेतरहाट की यात्रा में मुझे इसका उत्तर मिला। अपर घघारी जलप्रपात देखने के दौरान मेरी मुलाकात सुनील बिरजिया से हुई जो वहां गाइड का काम देखते हैं। उन्होंने मुझे बताया कि नेतरहाट के सबसे प्रसिद्ध टूरिस्ट स्पॉट मैग्नोलिया प्वाइंट के मैग्नोलिया का प्रेमी बटुक बिरजिया था। वही मैग्नोलिया का प्रेमी था।

जब यह प्रेम कहानी झारखंड के जंगलों में परवान चढ़ रही थी उस समय देश में अंग्रेजों का राज था। उन्होंने बताया कि बटुक बिरजिया कुशल बांसुरी वादक था और वो अंग्रेजों का घोड़ा चराने का काम करता था। मैग्नोलिया उसके बांसुरी वादन पर मोहित थी। दोनों के बीच प्रेम हो गया। बटुक बिरजिया की प्रेम कहानी क्षेत्र में चर्चित हो गयी। मैग्नोलिया के पिता को ये नागवार गुजरा।
पहले तो उन्होंने बटुक बिरजिया को मैग्नोलिया से न मिलने को कहा पर दोनों पर इसका कोई असर नहीं हुआ। नाराज होकर मैग्नोलिया के पिता ने बटुक बिरजिया को फांसी दे दी।
उसे शैले हाउस के बगल में फांसी दी गयी। बाद में जब यह जानकारी मैग्नोलिया को हुई तो उसने सनसेट प्वाइंट के पास घोड़े के साथ कूदकर अपनी जान दे दी। मैग्नोलिया प्वाइंट में मैग्नोलिया का नाम तो अपनी कहानी कहता है पर इसके नायक के साथ जो अन्याय हुआ वो नहीं कहता। मैं चाहता हूं कि मैग्नोलिया के साथ उसके प्रेमी को भी उसका देय मिले और उसका नाम मैग्नोलिया-बटुक सनसेट प्वाइंट हो।



