
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय में नवरात्र के अवसर पर सजायी गयी चैतन्य देवियों की झांकी

रांची : प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय चौधरी बगान में नवरात्र के अवसर पर रविवार को चैतन्य देवियों की झांकी सजाई गई। कार्यक्रम में फेडरेशन झारखंड चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा ने कहा कि भटके हुए पथभ्रष्ट इंसानों को देवियां ही सन्मार्ग पर लाती हैं।

उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक शिक्षा के जरिये अभी आसुरी वृतियों का संहार, मानव का उद्धार तथा नवयुग के निर्माण का कार्य हो रहा है। विश्व की गली-सड़ी व्यवस्था में आतंकवाद के भयानक कीटाणु पैदा हो गये हैं तथा मानवीय सृष्टि की कहानी पटाक्षेप पर पहुंची लगती है।
कार्यक्रम में मारवाड़ी युवा मंच समर्पण शाखा की अध्यक्ष पूजा अग्रवाल ने कहा नारी शक्ति अबला नहीं, बल्कि शिव शक्ति है, विकारों से तप्त धरती को हरा भरा करने वाली है।
तेजी से बदलते हुए वर्तमान समय की और इशारा करते हुए उन्होंने कहा जैसे दुर्गा हर संकटकाल में सबकी रक्षक बनी, वैसे शिव से शक्ति लेकर दशावी दुर्गा समान तेजस्वी बन उग्रवाद, आतंकवाद और हिंसा से त्रस्त सृष्टि को नयी दिशा दें। रात्रि में देवियों का सुमिरन जागरण करना वास्तव में ज्ञान प्रकाश पाने के लिए उनको आवाहन करने की यादगार है।
कार्यक्रम में सीएमपीडीआई के चीफ मैनेजर अजय सिन्हा ने कहा कि आज आवश्यकता इसी बात की है कि शाब्दिक स्तुति के साथ-साथ हम खुद से भी ज्ञानवान तेजस्वी व शक्तिवान बनें। भारत की पवित्र माताओं ब्रह्म कन्याओं ने अनेक प्रकार से आसुरीयता में डुबे जनमानस का कल्याण किया इसीलिए उनकी पूजा एक नहीं नों-नौ रूपों से हो रही है।
वहीं, एसबीआई के पूर्व एजीएम सुनील गुप्ता ने कहा दुर्गा से शक्ति सभी मांगते हैं जो मन के अन्दर बैठ रावण पर विजय पाने के लिए जरूरी है। भारत की अपनी जो भी समस्याएं हों लेकिन अंतत: इस देवभूमि से ही सभी को समाधान मिलेगा।
इसी तरह पूर्व प्रोफेसर कृष्ण कुमार दुबे ने कहा इस देवभूमि में सोलह हजार एक सौ आठ पूर्ण रुपेण समर्पित ब्रह्माकुमारी बहनों का काफिला विश्व भर में नैतिकता की मशाल जला रहा है जिनके अथक पुरूषार्थ से यह दुनियों शीघ्र बदलकर सुखमय बनेगी। इन शीतला देवियों की तपस्या आतंकवाद व हिंसा की गरजना को समाप्त करेगी।
कार्यक्रम में केन्द्र संचालिका ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने कहा कि एक बड़ी बिडम्बना की बात है कि आज लोग देवियों की भक्ति तो करते हैं, परन्तु शक्ति प्राप्त नहीं करते। अचरज कोई और नहीं थे बल्कि दुर्गुणों से भरेपूर मानव ही थे।
उन्होंने कहा पुण्य भूमि भारत में सतयुग और त्रेतायुग में देवी देवताओं का राज्य था। दुर्गुणों रूपी असुरों के द्वारा उस राज्य को छीनने पर ही शिव परमात्मा ने प्रजापिता ब्रह्मा कन्याओं को योग व ज्ञान की शक्ति दी है जिससे विकारों रूपी असुरों का संहार होगा।
अब वह दिन दूर नहीं जब योगबल की आत्मिक विजय के सम्पन्न होते ही आसुरी शक्तियाँ परस्पर युद्धों से स्वयं को नष्ट करेगी व दैवी प्रकृति के लोग विजयी होंगे।कार्यक्रम में मिट्टी की प्रतिमा की तरह भाव-भंगिमा प्रस्तुत करने वाली चेतन बहनों के दुर्गा की झांकी साथ-साथ जीती-जागती देवियों की झांकी ब्रह्माकुमारी की ओर से प्रस्तुत की गई।



