
नयी दिल्ली : हिंदी अखबार ‘दैनिक जागरण’ ने अपने अभियान ‘हिंदी हैं हम’ के तहत पहले नरेंद्र मोहन स्मृति साहित्य सम्मान के लिए प्रविष्टियां आमंत्रित की हैं। यह पुस्तक लेखन और पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए एक साहित्यिक पुरस्कार है।

प्रकाशन ने कहा कि जिन लेखकों की साहित्यिक कृतियों ने 2024 में पठनीयता, गुणवत्ता और विषय के आधार पर लोगों का ध्यान आकर्षित किया है, उन्हें दैनिक जागरण के पूर्व प्रधान संपादक और लेखक नरेंद्र मोहन की स्मृति में पांच लाख रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा।

दैनिक जागरण के पूर्व प्रधान संपादक नरेन्द्र मोहन जी ने 37 वर्षों तक दैनिक जागरण के संपादक और प्रधान संपादक के रूप में पत्रकारिता के उन मानदंडों की स्थापना की, जिन पर चलकर आज भी दैनिक जागरण नित नई सफलताएं अर्जित कर रहा है।
उन्होंने बड़ी संख्या में संपादकों-पत्रकारों को उनकी भूमिका के लिए तैयार किया। जब देश में आपातकाल लगा, तब एक संपादक के रूप में नरेन्द्र मोहन जी ने दैनिक जागरण के 27 जून 1975 के संपादकीय में नया लोकतंत्र? सेंसर लागू, शांत रहें !
लिखकर कॉलम को खाली छोड़ दिया था। यह आपातकाल का प्रतिकार था। इसकी कीमत उनको चुकानी पड़ी थी। 28 जून, 1975 की रात उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
भारत और भारतीय संस्कृति में नरेन्द्र मोहन जी की गहरी आस्था थी, जो उनके लोकप्रिय स्तंभ विचार प्रवाह में परिलक्षित होती थी। संपादक होने के नाते राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक विषयों पर उनकी पैनी नजर रहती थी। वहीं उनकी रचनात्मकता का एक और आयाम उनके गद्य और पद्य में भी देखा जा सकता था।



