
चार से सात सितंबर तक चलेगा शताब्दी दिवस कार्यक्रम

स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने लिया कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा

कार्यक्रम में रिनपास के रिटायर्ड डायरेक्टर्स, मेडिकल सुपरिटेंडेंट्स तथा फैकल्टी को सम्मानित किया जायेगा
कार्यक्रम में की नोट एड्रेस निमहांस बंगलुरू की डायरेक्टर डॉ प्रतिमा मूर्ति देंगी
रांची : कांके स्थित रांची तंत्रिका मनोचिकित्सा एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान (रिनपास) के 100 साल गुरूवार (4 सितंबर) को पूरे हो गए। इस मौके पर चार से सात सितंबर तक संस्थान में शताब्दी दिवस कार्यक्रम आयोजित किया जायेगा।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन होंगे वहीं, विशिष्ट अतिथि के रूप में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम के पहले दिन 4 नवंबर को रिनपास की 100 साल की यात्रा पर एक डॉक्यूमेंट्री दिखायी जायेगी। इस डॉक्यूमेंट्री में रिनपास के 100 साल की यात्रा में आये उतार-चढ़ाव और बदलावों को प्रदर्शित किया जायेगा।
कार्यक्रम की तैयारियों को बुधवार को स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने जायजा लिया। संस्थान के जेई धनजीभॉय अकादमिक एंड रिसर्च सेंटर में होनेवाले इस कार्यक्रम की सारी तैयारियां पूरी हो चुकी है। डाक विभाग की ओर से इस ऐतिहासिक अवसर पर स्मारक डाक टिकट भी जारी किया गया है।
शताब्दी समारोह में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के नये अध्याय की शुरूआत होगी
कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा लेने पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने पत्रकारों से कहा कि शताब्दी दिवस समारोह न केवल एक ऐतिहासिक अवसर है बल्कि इस मौके पर मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के एक नये अध्याय की शुरूआत होगी।यह पूरे झारखंड के लिए गर्व और मनोरोगियों के लिए एक नयी उम्मीद लेकर आयेगा।
मुंगेर से होते हुए कांके स्थानांतरित हुआ रिनपास
गौरतलब है कि रिनपास की नींव 1795 में मुंगेर में एक लूनैटिक असायलम के रूप में रखी गई थी। वर्ष 1821 में यह पटना कॉलेजिएट में स्थानांतरित हुआ और 1925 में नामकुम होते हुए कांके पहुंचा। 4 सितंबर 1925 को यहां 110 पुरुष और 19 सितंबर 1925 को 53 महिला मरीज भर्ती किए गए थे। तब इसका नाम इंडियन मेंटल हॉस्पिटल रखा गया और इसके पहले अधीक्षक कैप्टन जे ई धुंजीभॉय बने।
स्वतंत्रता के बाद वर्ष 1958 में इसका नाम बदलकर रांची मानसिक आरोग्यशाला कर दिया गया। 1998 में इसे स्वायत्त दर्जा मिला और इसका नाम रांची तंत्रिका मनोचिकित्सा एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान कर दिया गया। आज यह संस्थान मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं, शोध और शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र है।
वर्तमान में रिनपास में 550 बेड का मानसिक रोगी वार्ड, 50 बेड का नशामुक्ति केंद्र और पुनर्वास के लिए हाफ-वे होम जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। यहां डीएनबी मनोचिकित्सा, क्लीनिकल साइकोलॉजी और मनोरोग सामाजिक कार्य में एमफिल और पीएचडी जैसे शैक्षणिक पाठ्यक्रम भी संचालित होते हैं।
संस्थान हर साल हजारों मरीजों को सेवा प्रदान करता है। वर्ष 2024-25 में 71 हजार से अधिक मरीजों का इलाज किया गया। टेली-मेंटल हेल्थ सेवाएं, आत्महत्या रोकथाम हेल्पलाइन और ग्रामीण-आदिवासी क्षेत्रों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं इसकी विशेष उपलब्धियों में शामिल हैं।


