बिहार विधानसभा चुनाव लड़ेगी झामुमो, महागठबंधन की जीत सुनिश्चित करने में निभायेगी भूमिका : सुप्रियो भट्टाचार्य

Dayanand Roy
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आदिवासियों और मूलवासियों को वनभूमि का राजस्व पट्टा देने की दिशा में काम कर रही सरकार

हेमंत सरकार शिबू सोरेन के आवास को संग्रहालय के रूप में तब्दील करे

विस्थापन और पुनर्वास आयोग की नियमावली को मंजूरी सराहनीय पहल

ललित कला अकादमी, साहित्य अकादमी और संगीत नाटक अकादमी का गठन करम की पूर्व संध्या पर जनता को राज्य सरकार का तोहफा

रांची : झामुमो बिहार में विधानसभा चुनाव लड़ेगी और महागठबंधन की जीत में अपनी भूमिका सुनिश्चित करेगी। इसे लेकर पार्टी ने महागठबंधन के घटक दलों को अपनी चाहत बता दी है। बुधवार को बातें झामुमो महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहीं।

सुप्रियो ने कहा कि यह साफ है कि पार्टी बिहार में विधानसभा चुनाव लड़ेगी। हम वहां गए थे और विधानसभावार पार्टी जहां चुनाव लड़ना चाहती है इसकी इच्छा जतायी है।

वहां कई दल है जिसमें मुख्य रूप से राजद, कांग्रेस, वीआइपी और वाम दल शामिल हैं। यहां हम कांग्रेस, राजद और माले के साथ गठबंधन में हैं। अब इन तीनों दलों के नेतृत्व को सोचना है। जब इसकी औपचारिक घोषणा होगी तो सब साफ होगा। पर यह तय है कि पार्टी बिहार विधानसभा चुनाव लड़ेगी और महागठबंधन की जीत में अपनी भूमिका सुनिश्चित करेगी।

श्री भट्टाचार्य ने कहा कि मंगलवार को हेमंत सरकार ने कैबिनेट की बैठक में राज्य में विस्थापन और पुनर्वास आयोग की नियमावली को मंजूरी दी। इसके साथ ही ललित कला अकादमी, साहित्य अकादमी और संगीत नाटक अकादमी का गठन करम की पूर्व संध्या पर जनता को तोहफा दिया है।

अब जो लोग वर्षों से जमीन में जोत-कोड़ कर रहे हैं उन्हें वनभूमि का राजस्व पट्टा देने का काम सरकार को करना है। इसके साथ ही वनोपज में आदिवासियों और मूलवासियों की हिस्सेदारी सुनिश्चित करनी है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2001 से ही विस्थापन के खिलाफ पार्टी आंदोलन करती रही है। एनएचपीसी की कोयलकारो परियोजना के खिलाफ जब आंदोलन हुआ तो झारखंड में बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में सरकार चल रही थी। बाद में इस मामले को जब दिशोम गुरू शिबू सोरेन ने संसद में उठाया तो यह परियोजना बंद हुई। नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज के खिलाफ भी लंबे समय से आंदोलन चला और बाद में जनभावनाओं की कदर करते हुए इसे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बंद कराया।

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री की मां को अपशब्द नहीं कहा। यदि प्रधानमंत्री की ओर से कहा जाता है विधवा, पचास करोड़ की गर्लफ्रेंड, बार बाला, पंचर बनानेवाला यह अशोभनीय है। यह बहुत दुखद है कि इस प्रकार की घटना हुई। जिसने प्रधानमंत्री की मां को गाली दी, उसे पुलिस ने पकड़ लिया और उसका पॉलिटिकल कनेक्शन भी साफ हो चुका है।

उस मामले में राहुल गांधी पर एफआइआर करना और पटना में कांग्रेस कार्यालय में लंपटगिरी करना अच्छा नहीं है।अब अगर बबूल बोयेंगे तो उससे आम का फल नहीं होगा। मां मां होती है। मां अपने आप में बड़ा शब्द है। पर जिस प्रकार भाजपा ने देश की माताओं बहनों पर टिप्पणियां की है उसके लिए पार्टी को सार्वजनिक रूप से देशवासियों से माफी मांगनी चाहिए।

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