
रांची : सरयू राय की प्रेरणा से शुरू हुआ बाल मेला आज बच्चों के अधिकार, पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य के प्रति जन-जागृति का एक सशक्त मंच बन चुका है। इस वर्ष विश्व बाल दिवस का विषय ‘प्यार से पालन-पोषण – विश्व का नेतृत्व’ बच्चों के लिए प्रेमपूर्ण, सुरक्षित और संवेदनशील वातावरण की अनिवार्यता पर बल देता है। बुधवार को ये बातें राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहीं। वे जमशेदपुर के साकची में आयोजित चतुर्थ बाल मेले में बोल रहे थे।

उन्होंने बच्चों के अधिकारों और उनके समग्र विकास से जुड़ी वर्तमान चुनौतियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि झारखंड सहित कई राज्यों में कुपोषण, कम वजन और एनीमिया जैसी समस्याएं अभी भी गंभीर हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश कुपोषण-मुक्त भारत की दिशा में निर्णायक कदम उठा रहा है और झारखंड में भी इन प्रयासों को और अधिक गति देने की आवश्यकता है।

राज्यपाल ने कहा कि बाल मेला केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि ऐसा बहुआयामी सामाजिक प्रयास है जो माता-पिता, शिक्षक, स्वास्थ्यकर्मी, जन-प्रतिनिधि, सामाजिक संस्थाएं, कॉरपोरेट जगत, मीडिया और नागरिक समाज को एक साथ लाता है। उन्होंने कहा कि झारखंड की धरती जनजातीय संस्कृति और परंपरा से समृद्ध है। जनजातीय समाज की यह मान्यता कि बच्चा केवल परिवार का नहीं, पूरे समुदाय का होता है, दुनिया को सामुदायिक सहयोग और सामूहिक जिम्मेदारी का अमूल्य संदेश देती है। उन्होंने कहा कि राज्य के सुदूरवर्ती क्षेत्रों और विभिन्न विद्यालयों के भ्रमण के दौरान उन्होंने बच्चों की रचनात्मक प्रतिभा, खेल-कूद की क्षमता, संगीत-नृत्य की स्वाभाविक समझ तथा प्रकृति के प्रति गहरी संवेदना देखी है।
राज्यपाल ने बालिका शिक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि एक शिक्षित बेटी ही शिक्षित परिवार और सशक्त समाज की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि बच्चे केवल भविष्य नहीं, बल्कि आज की प्राथमिकता हैं। इसलिए सभी मिलकर ऐसा वातावरण बनाएं जहां राज्य का हर बच्चा स्वस्थ, शिक्षित, सुरक्षित और खुशहाल होकर आगे बढ़ सके।


