भारत में डायबिटीज (मधुमेह) के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे देश को दुनिया की ‘डायबिटीज कैपिटल’ कहा जाने लगा है। कभी यह बीमारी मुख्य रूप से बढ़ती उम्र के लोगों तक सीमित मानी जाती थी, लेकिन अब युवाओं और किशोरों में भी इसके मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह केवल स्वास्थ्य संबंधी समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक चुनौती भी बन चुकी है। इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन (IDF) के अनुसार दुनिया में 20 से 79 वर्ष आयु वर्ग के करोड़ों लोग डायबिटीज से प्रभावित हैं, जिनमें भारत की हिस्सेदारी सबसे अधिक प्रभावित देशों में शामिल है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि देश में वास्तविक मरीजों की संख्या आधिकारिक आंकड़ों से भी अधिक हो सकती है।
प्री-डायबिटीज सबसे बड़ी चिंता
विशेषज्ञों के मुताबिक भारत में प्री-डायबिटीज के मामलों की संख्या भी बेहद चिंताजनक है। प्री-डायबिटीज वह स्थिति है, जिसमें रक्त में शुगर का स्तर सामान्य से अधिक होता है, लेकिन अभी डायबिटीज की श्रेणी में नहीं पहुंचता। यदि समय रहते जीवनशैली में सुधार नहीं किया जाए, तो यह स्थिति आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज में बदल सकती है। यही कारण है कि नियमित स्वास्थ्य जांच और शुरुआती पहचान बेहद जरूरी मानी जाती है।
बदलती जीवनशैली बना रही है बड़ा कारण
डायबिटीज के बढ़ते मामलों के पीछे सबसे बड़ा कारण आधुनिक जीवनशैली को माना जा रहा है। पहले लोगों की दिनचर्या में शारीरिक श्रम अधिक होता था, लेकिन अब लंबे समय तक बैठकर काम करना, मोबाइल और टीवी के सामने घंटों बिताना तथा व्यायाम की कमी आम हो गई है। इसके साथ ही फास्ट फूड, प्रोसेस्ड फूड, मीठे पेय और अधिक कैलोरी वाले स्नैक्स का बढ़ता सेवन मोटापा और इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ावा देता है। यही कारण है कि कम उम्र में भी डायबिटीज का खतरा बढ़ रहा है।
इन शुरुआती लक्षणों को न करें नजरअंदाज
डायबिटीज के शुरुआती संकेतों में बार-बार प्यास लगना, लगातार पेशाब आना, मुंह सूखना, अत्यधिक थकान महसूस होना, बिना कारण वजन कम होना और घावों का देर से भरना शामिल हो सकते हैं। कई लोग इन लक्षणों को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे बीमारी का पता देर से चलता है। 35 वर्ष की उम्र के बाद नियमित ब्लड शुगर जांच कराना और परिवार में डायबिटीज का इतिहास होने पर समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण करवाना बेहद जरूरी है।
इन आसान उपायों से घट सकता है खतरा
डायबिटीज से बचाव के लिए रोजाना कम से कम 30–45 मिनट तेज चाल से चलना या व्यायाम करना फायदेमंद माना जाता है। संतुलित आहार में मोटे अनाज, दालें, हरी सब्जियां और ताजे फल शामिल करें तथा मीठे पेय और अतिरिक्त चीनी का सेवन सीमित रखें। पर्याप्त नींद लें, तनाव कम करने के लिए योग और ध्यान करें तथा वजन को नियंत्रित रखें। स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर डायबिटीज के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता, समय पर जांच और सही जीवनशैली ही इस बढ़ती चुनौती से निपटने का सबसे प्रभावी तरीका है।
