National Herbs and Spices Day: हर साल आज यानी 10 जून को नेशनल हर्ब्स एंड स्पाइसेज डे मनाया जा रहा है। यह दिन जड़ी-बूटियों और मसालों के महत्व, उनकी विविधता और उनके स्वास्थ्य लाभों को पहचान देने के लिए समर्पित है। पहली बार इस दिवस को आधिकारिक रूप से वर्ष 2015 में मनाया गया था। हालांकि, इसका इतिहास इससे भी पुराना है। वर्ष 1999 में इसे केवल “हर्ब डे” के रूप में जाना जाता था, बाद में इसका विस्तार कर इसे राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी गई।
जड़ी-बूटियों और मसालों का ऐतिहासिक महत्व
जड़ी-बूटियां और मसाले केवल भोजन का स्वाद बढ़ाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सदियों से औषधीय उपयोग का भी महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। इतिहासकारों के अनुसार, Charlemagne (742-814 ई.) जड़ी-बूटियों के बड़े प्रशंसकों में से एक थे। कहा जाता है कि उन्होंने 74 विभिन्न जड़ी-बूटियों की सूची तैयार कर उन्हें अपने बगीचों में उगाने का निर्देश दिया था। मध्य युग तक आते-आते जड़ी-बूटियों और मसालों का उपयोग भोजन और चिकित्सा दोनों क्षेत्रों में व्यापक रूप से होने लगा।
भारत में मसालों की हजारों साल पुरानी विरासत
भारत का मसालों से संबंध हजारों वर्षों पुराना है। प्राचीन भारतीय ग्रंथों जैसे Rigveda, Yajurveda, Samaveda और Atharvaveda में मसालों और औषधीय पौधों का उल्लेख मिलता है। इन ग्रंथों से पता चलता है कि भारतीय सभ्यता में मसालों का उपयोग भोजन, आयुर्वेद और धार्मिक अनुष्ठानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है।
भारत कैसे बना ‘स्पाइस हब’?
भारत को दुनिया का “स्पाइस हब” कहा जाता है। इसका प्रमुख कारण यहां की विविध जलवायु और अनुकूल भौगोलिक परिस्थितियां हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में उच्च आर्द्रता, उष्णकटिबंधीय मौसम और उपजाऊ मिट्टी विभिन्न प्रकार के मसालों की खेती के लिए आदर्श वातावरण प्रदान करती है। वर्ष 1498 में Vasco da Gama के भारत पहुंचने के बाद भारतीय मसालों का व्यापार यूरोप और अन्य देशों तक तेजी से फैल गया। समय के साथ भारतीय मसालों की मांग बढ़ती गई और भारत वैश्विक मसाला व्यापार का प्रमुख केंद्र बन गया।
