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नीट छात्रा मौत मामले की अब होगी सीबीआई जांच

by Dayanand Roy

पटना : बिहार की राजधानी पटना के शंभू हॉस्टल में नीट की तैयारी कर रही छात्रा की  मौत मामले की अब सीबीआई जांच होगी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्र सरकार से इस मामले की सीबीआई जांच कराने की सिफारिश की है।

इसकी जानकारी उपमुख्यमंत्री  सम्राट चौधरी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा की है। उन्होंने पोस्ट कर लिखा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भारत सरकार से पटना में हुए नीट छात्रा की हत्या के मामले (कांड संख्या- 14/26) को सीबीआई से जांच का आग्रह किया है। ताकि घटना का पारदर्शी और न्यायपूर्ण तरीके से उद्भेदन निश्चित किया जाए।

दरअसल, इस घटना के सामने आने के बाद से ही राज्यभर में आक्रोश का माहौल बना हुआ था। छात्र संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक दलों ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए सीबीआई जांच की आवश्यकता बताई थी। आरोप था कि स्थानीय पुलिस मामले की गंभीरता को कम करके दिखा रही है और कुछ प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिश कर रही है।

पीड़िता के परिवार ने भी बार-बार न्याय की गुहार लगाई थी और उच्चस्तरीय जांच की मांग की थी। मामले की जांच फिलहाल एसआईटी, सीआईडी और एफएसएल की रिपोर्ट के आधार पर की जा रही है। लेकिन जांच की दिशा और गति को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल सबूत, हॉस्टल प्रबंधन की भूमिका और संदिग्ध युवकों की पहचान को लेकर लगातार नई बातें सामने आ रही हैं।

लेकिन पुलिस पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं। पुलिस की कार्यशैली शक के घेरे में है। शुक्रवार को  डीजीपी ने पीड़िता के मां-बाप को बुलाया। जिसके बाद इस हत्याकांड ने नया रूप ले लिया। पीड़िता के मां-बाप ने आरोप लगाया कि डीजीपी विनय कुमार ने उनसे कहा है कि आपकी बेटी ने सुसाइड की है, आप इस बात को मान लीजिए।

परिजन जब डीजीपी के आवास के बाहर निकलें तो मीडिया के सामने अपना गुस्सा जाहिर किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस बिक गई है, मामले को दबाया जा रहा है और उनसे बोला जा रहा है कि वो मान ले कि उनकी बेटी ने आत्महत्या की है। परिजनों का सीधा आरोप है कि पुलिस शुरू से ही इस मामले को रफा-दफा करने और इसे आत्महत्या साबित करने पर तुली हुई थी। हैरानी की बात यह है कि जब छात्रा अचेत मिली, तो पुलिस ने तुरंत हॉस्टल मालिक मनीष रंजन को रिमांड पर क्यों नहीं लिया?

क्यों घटना के बाद कमरे को तुरंत साफ किया गया? परिजनों का कहना है कि उन्हें एक रसूखदार सफेदपोश नेता के नाम पर धमकाया जा रहा है। सवाल यह उठता है कि क्या पुलिस किसी बड़े राजनेता या प्रभावशाली व्यक्ति को बचाने की कोशिश कर रही है? पीएमसीएच के पोस्टमार्टम करने वाले बोर्ड ने फाइनल टेस्ट रिपोर्ट में छात्रा के शरीर पर कई जगहों पर खरोंच और ब्रूज जैसे जख्म को मेंशन किया। लेकिन एज आफ इंजुरी के बारे में नहीं बताया गया। एक और सच्चाई यह भी सामने आई कि छात्रा को आधी बेहोशी की हालत में इलाज के लिए लाया गया था।

एक तरफ जहां पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक साक्ष्य चीख-चीखकर यौन शोषण और शारीरिक हिंसा की गवाही दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पटना पुलिस का शुरुआती जांच में इसे ‘आत्महत्या’ साबित करने पर अड़े रहना एक गहरे और सुनियोजित षड्यंत्र की ओर इशारा करता है। प्रभावशाली सफेदपोशों को बचाने के आरोपों और रसूखदार ‘हॉस्टल-अस्पताल-पुलिस’ गठजोड़ की आहट ने इस संवेदनशील मामले को अब सीबीआई की दहलीज तक पहुंचा दिया है।

इस बीच जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि मृतका के परिजनों ने सीबीआई जांच की मांग की थी, अब नीतीश कुमार ने केंद्र सरकार से नीट छात्रा मौत मामले  की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच का आग्रह किया है, सब दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा। वहीं, बिहार कांग्रेस प्रवक्ता स्नेहाशीष वर्धन ने कहा कि बिहार में अपराधियों का गुंडाराज एनडीए के संरक्षण में चल रहा है। नीट छात्रा मामले में इतनी लीपा-पोती की जा रही है। स्पष्ट है कि दोषियों को बचाने में ना केवल सरकार लगी हुई है बल्कि अब पुलिस भी इसमें शामिल है।

हम आज ये सोचने पर विवश है कि आरा, पूर्णिया सहित तमाम ऐसे घटनाक्रम को कैसे सरकार दबा रही है और किसको बचा रही है? ये सबसे बड़ा सवाल है। जबकि बिहार भाजपा प्रवक्ता प्रभाकर मिश्रा ने कहा कि विपक्ष को शर्म आनी चाहिए। एक दुखद घटना पर भी वे लोग राजनीति की दुकान खोल कर बैठे हैं। जांच चल रही है, पुलिस अपना काम कर रही है। लेकिन विपक्ष पहले ही फैसला सुना रहा है।

आज सवाल सरकार पर नहीं विपक्ष के मंशा पर है। वहीं, राजद प्रवक्ता एज्या यादव ने कहा कि पुलिस का चेहरा साफ हो गया है, किस रसूखदार को बचाना चाहती है पुलिस। अब तो हद ही हो गई है, डीजीपी परिजनों को बुलाकर कहते है कि ‘ये सुसाइड है,मान लें’।

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