
महेश कुमार सिन्हा

पटना : बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में बनी एनडीए की नई सरकार मंत्रियों के बीच विभागों के बंटवारे के बाद से ही चर्चा में है। सबसे अधिक चर्चा गृह विभाग को लेकर हो रही है। दरअसल 20 साल में पहली बार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गृह विभाग अपने पास नहीं रखा है।भाजपा कोटे से उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इसके लिए भाजपा और जदयू के शीर्ष नेताओं ने गहन मंथन की। दोनों पक्षों के बीच आपसी समझ बनने के बाद नीतीश कुमार गृह मंत्रालय छोड़ने पर राजी हो गए।साथ ही इसके लिए उन्होने सम्राट चौधरी को अपनी पसंद बताया।हाल के दिनों में नीतीश और सम्राट की केमेस्ट्री काफी अच्छी रही है ।
राज्य की कानून-व्यवस्था का नियंत्रण पार्टी के हाथों में आने के बाद भाजपा का कद भी बढ़ा है। पार्टी अब प्रशासनिक शक्ति की भी भागीदार बन गई है। इसको लेकर सियासी गलियारे में खूब चर्चा हो रही है। इसकी वजह यह है कि इसे सबसे महत्वपूर्ण विभाग माना जाता है।मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हमेशा इसे अपने पास रखते थे। अचानक हुए इस बदलाव को एक बड़े राजनीतिक पुनर्गठन के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। यह राज्य प्रशासन और सत्ता की संरचना में आने वाले बड़े बदलावों की तैयारी की ओर इशारा कर रहा है।
सियासी गलियारे में चल रही चर्चा में गृह विभाग सम्राट चौधरी को सौंपने के साथ ही सत्ता के भौगोलिक केंद्र में भी बदलाव की अटकलें लगाई जा रही हैं। पारंपरिक रूप से, गृह विभाग की कमान संभालने वाला व्यक्ति ही राज्य की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और खुफिया तंत्र का सीधा नियंत्रण रखता है। अब तक यह नियंत्रण मुख्यमंत्री आवास से संचालित होता था।
लेकिन अब यह माना जा रहा है कि सम्राट चौधरी का सरकारी आवास इस महत्वपूर्ण प्रशासनिक शक्ति का नया केंद्र बनेगा। यह बदलाव न केवल विभागों का हस्तांतरण है, बल्कि उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की भाजपा के भीतर बढ़ते कद और सरकार में उनकी अहमियत को भी दर्शाता है। सूत्रों की मानें तो भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व ने जदयू और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से गहन चर्चा के बाद यह व्यवस्था की गई। इसमें अहम भूमिका भाजपा के बिहार प्रभारी विनोद तावड़े के साथ-साथ बिहार में भाजपा के चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान की रही है।
सूत्रों के मुताबिक धर्मेंद्र प्रधान का मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से बेहद नजदीकी रिश्ता रहा है। ऐसे में उनके द्वारा यह प्रस्ताव भेजा गया। लेकिन बात ज्यादा नहीं बनते देख भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसमें अहम भूमिका निभाते हुए जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा और केन्द्रीय मंत्री एवं जदयू के वरिष्ठ नेता ललन सिंह से इस पर गहन चर्चा की।
इसके बाद उन दोनों नेताओं ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से इसपर चर्चा की। सूत्रों की मानें तो काफी मंथन और मान मनौव्वल के बाद यह तय किया गया कि गृह विभाग अगर भाजपा को दिया जायेगा तो भाजपा को वित्त विभाग को जदयू के लिए छोड़ना होगा। मालूम हो कि राज्य में एनडीए के अबतक के पूरे शासनकाल में वित्त मंत्रालय भाजपा के जिम्मे ही रहा था।
इसके बाद इसपर सहमति बनाई गई कि भाजपा को गृह विभाग की जिम्मेवारी दे दी जाए और वित्त मंत्रालय जदयू कोटे में आ जाए। जानकारों की मानें तो नीतीश कुमार भी हर रोज के प्रशासनिक बोझ से खुद को हल्का करना चाहते थे। विधि-व्यवस्था की जिम्मेदारी भाजपा के जिम्मे सौंपकर वे आये दिन की कहासुनी से मुक्त हो गए । दरअसल, हाल के दिनों में बढ़ती आपराधिक घटनाओं के कारण विपक्ष लगातार हमलावर बना हुआ था। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव इस मुद्दे पर प्राय: हर दिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए बिमार तक कह दिया करते थे। ऐसे में रोज के किचकिच से दूर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब अपना ध्यान विकासात्मक कार्यों पर केंद्रित करेंगे।
आपराधिक घटनाओं के लिए अब भाजपा और सम्राट चौधरी को जिम्मेदार ठहराया जायेगा। जानकारों की मानें तो यह कदम एक ऐसी व्यवस्था की ओर इशारा करता है, जहां मुख्यमंत्री अपनी प्रशासनिक शक्तियों को साझा करते हुए गठबंधन के सहयोगी को अधिक विश्वास दिला रहे हैं। वैसे इसका इशारा केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सम्राट चौधरी के चुनाव प्रचार के दौरान उनके क्षेत्र तारापुर के लोगों को यह कह कर दिया था कि इनको आप जिताएं, इनको बड़ी जिम्मेदारी मिलेगी। सूत्रों की मानें तो अमित शाह ने साफ-साफ निर्देश दिया है कि कानून-व्यवस्था की स्थिति पर कड़ाई से काम किया जाए ताकि आपराधिक घटनाओं पर अंकुश लग सके।


