
नयी दिल्ली: ‘फांसी घर’ बनाम ‘टिफिन रूम’ विवाद के बीच, दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने बुधवार को विधानसभा परिसर में मीडियाकर्मियों को ‘फांसी घर’ का दौरा कराया।

गुप्ता ने कहा कि ‘फांसी घर’ वास्तव में एक ‘टिफिन रूम’ था और यह गलत धारणा है कि इसका इस्तेमाल ब्रिटिश शासन के दौरान स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी देने के लिए किया जाता था।

विधानसभा अध्यक्ष ने संवाददाताओं को बताया कि ऐतिहासिक दिल्ली विधानसभा भवन का निर्माण 1911 में किंग जॉर्ज पंचम के राज्याभिषेक के बाद आठ महीने में कराया गया था। उन्होंने बताया कि वास्तव में पुली-संचालित लिफ्ट वाले दो ‘टिफिन रूम’ उस इमारत का हिस्सा थे, जो ब्रिटिश शासन के दौरान ‘इंपीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल’ के रूप में काम करती थी।
गुप्ता ने कहा कि ‘टिफिन रूम’ समेत हर कमरे का विवरण उपलब्ध कराने वाला इमारत का नक्शा राष्ट्रीय अभिलेखागार में रखा हुआ है।
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने नौ अगस्त 2022 को तथाकथित ‘फांसी घर’ का उद्घाटन किया था।
सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायकों ने मंगलवार को विधानसभा में बहस के दौरान विपक्षी दल आम आदमी पार्टी (आप) पर लोगों को इस मुद्दे पर गुमराह करने का आरोप लगाया था।



