आज के समय में टैटू केवल फैशन या स्टाइल का हिस्सा नहीं, बल्कि अपनी पहचान और व्यक्तित्व को व्यक्त करने का माध्यम भी बन चुका है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि टैटू बनवाना सिर्फ सौंदर्य का फैसला नहीं, बल्कि स्वास्थ्य से जुड़ा विषय भी है। इसलिए टैटू बनवाने से पहले स्वच्छता, इस्तेमाल होने वाली स्याही और अपनी स्वास्थ्य स्थिति पर जरूर ध्यान देना चाहिए।
शरीर टैटू की स्याही को विदेशी पदार्थ मानता है
विशेषज्ञों के अनुसार, जब टैटू की स्याही त्वचा की मध्य परत (डर्मिस) में पहुंचती है, तो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली उसे एक बाहरी पदार्थ के रूप में पहचानती है। उसे हटाने के लिए सफेद रक्त कोशिकाएं सक्रिय हो जाती हैं, लेकिन स्याही के कण बड़े होने के कारण उन्हें पूरी तरह हटाया नहीं जा सकता। यही वजह है कि टैटू लंबे समय तक त्वचा पर बना रहता है।
कुछ रंगों से बढ़ सकता है एलर्जी का खतरा
लाल, पीले और नारंगी रंग की कुछ टैटू स्याहियों से एलर्जी या लंबे समय तक सूजन की समस्या होने का जोखिम अधिक माना जाता है। कुछ अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि कुछ स्याहियों में निकल, क्रोमियम और सीसे जैसी धातुओं के अंश हो सकते हैं। इसके अलावा, स्याही के सूक्ष्म कण समय के साथ शरीर के लिम्फ नोड्स तक पहुंच सकते हैं, हालांकि इनके दीर्घकालिक प्रभावों पर अभी भी शोध जारी है।
टैटू बनवाने से पहले लें विशेषज्ञ की सलाह
यदि आपको ल्यूपस, सोरायसिस जैसी ऑटोइम्यून बीमारी है, प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर है या त्वचा संबंधी कोई गंभीर समस्या है, तो टैटू बनवाने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। साथ ही, हमेशा लाइसेंस प्राप्त और स्वच्छता के मानकों का पालन करने वाले टैटू स्टूडियो का ही चयन करें तथा इस्तेमाल होने वाली स्याही और उपकरणों के बारे में जानकारी अवश्य लें। इससे संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
