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बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में नई सरकार 20 नवंबर तक ले सकती है शपथ

by Dayanand Roy

पीएम मोदी और देश के कई अन्य राजनेता शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगे

महेश कुमार सिन्हा

पटना : बिहार विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत मिलने के बाद एनडीए ने सरकार बनाने की कवायद तेज कर दी है। पटना से  दिल्ली तक सरकार के स्वरूप को लेकर मंथन चल रहा है। पटना में मुख्यमंत्री आवास पर हलचल बढ़ गई है। एनडीए नेताओं का मुख्यमंत्री नीतीश कुमार  से मिलने का सिलसिला जारी है।

रविवार को सुबह केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय, राज्य के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा और रालोमो प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा मुख्यमंत्री से मिले। नीतीश कुमार से मुलाकात के बाद विजय सिन्हा और उपेंद्र कुशवाहा दिल्ली रवाना हो गए। उधर दिल्ली में शनिवार को सरकार गठन को लेकर केंद्रीय मंत्री ललन सिंह और जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी।

पटना में पार्टी नेताओं की बैठक के बाद सीएम नीतीश का फरमान लेकर जदयू के दोनों बड़े नेता अमित शाह से मिलने दिल्ली गए थे। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस बीच भाजपा के बिहार चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान और संगठन प्रभारी तावड़े ने भी अमित शाह से मुलाकात की है। सूत्रों की माने तो

नीतीश कुमार का एक बार फिर से मुख्यमंत्री बनना तय माना जा रहा है। मंगलवार को एनडीए के घटक दलों के नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक में नीतीश कुमार को सर्वसम्मति से एनडीए विधायक दल का नेता चुना जाएगा। नीतीश कुमार  के नेतृत्व में एनडीए की नई सरकार का शपथ ग्रहण 20 नवंबर तक हो सकता है। दरअसल, शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी शामिल होना है।

ऐसे में पीएम की उपलब्धता को देखते हुए समारोह का आयोजन एक दिन आगे या पीछे हो सकता है। शपथ ग्रहण समारोह को ऐतिहासिक बनाने के लिए तैयारी भी शुरु हो चुकी है।

चुनाव को लेकर लागू आचार संहिता रविवार को समाप्त  हो गई। सोमवार को वर्तमान  कैबिनेट की अंतिम बैठक होगी ,जिसमें विधानसभा भंग  करने की सिफारिश की जायेगी।

 मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सोमवार को राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं।इसके साथ ही नई सरकार गठन की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू होगी।

चुनाव आयोग ने रविवार को 18वीं विधानसभा चुनाव के परिणाम  से राज्यपाल को अवगत करा दिया है। अब विधानसभा के गठन की अधिसूचना जारी होगी। वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल 22 नवंबर तक है।

नीतीश कुमार 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। शपथ ग्रहण समारोह की तारीख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपलब्धता को ध्यान में रखकर तय की जाएगी। संभावना जताई जा रही है 20 नवंबर के आसपास शपथ ग्रहण का कार्यक्रम रखा जाएगा। इसको लेकर पटना में प्रशासनिक गतिविधियां  तेज हो गई हैं। चूंकि राजभवन के राजेंद्र मंडपम में मरम्मत का काम चल रहा है, इसलिए शपथ ग्रहण समारोह में एक बड़ा राजनीतिक संदेश देने के लिए गांधी मैदान को चुना गया है। प्रशासन ने समारोह को भव्य बनाने के लिए एक खास योजना तैयार की है।

गांधी मैदान में लगभग 5000 वीवीआईपी अतिथियों के बैठने के लिए एक विशेष खंड तैयार किया जा रहा है। इसमें सुरक्षा और सुविधाओं का खास ध्यान रखा जाएगा। शपथ ग्रहण का  भव्य मंच तैयार हो रहा है, जहां गठबंधन के वरिष्ठ नेताओं और मंत्रियों को जगह मिलेगी। चूंकि देश के शीर्ष नेता शामिल होंगे इसलिए गांधी मैदान के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया गया है।

एनडीए की शानदार जीत को राष्ट्रीय मंच पर भुनाने के लिए पार्टी ने अपने शीर्ष नेतृत्व को शामिल करने की पूरी योजना बनाई है। समारोह की सबसे बड़ी उपस्थिति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हो सकती है। उनकी मौजूदगी एनडीए की जीत को राष्ट्रीय पटल पर मजबूत करेगी। केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा भी शपथ ग्रहण में शामिल होंगे।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव सहित एनडीए और भाजपा शासित कई राज्यों के मुख्यमंत्री इस समारोह में शिरकत करेंगे। केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी सहित केंद्र सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री भी शपथ ग्रहण में शामिल होकर नीतीश कुमार को बधाई देंगे।

सूत्रों के अनुसार 18 और 19 नवंबर को एनडीए के घटक दलों की अलग-अलग विधायक दल की बैठक होगी। इसमें विधायक दल का नेता चुना जायेगा। लोजपा आर ने इसकी शुरुआत कर दी है। शनिवार को लोजपा आर के नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक में गोविंदगंज से चुनाव जीते राजू तिवारी को विधायक दल का नेता चुन लिया गया। सभी दलों के विधायक दल की अलग-अलग बैठक के बाद एनडीए विधायक दल की संयुक्त बैठक होगी, जिसमें मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर  लगेगी। सूत्रों के मुताबिक  नई सरकार में भाजपा से 15-16, जदयू से 14-15 मंत्री बनाए जा सकते हैं। जबकि चिराग पासवान की लोजपा (रामविलास) को 3, रालोमो और हम को एक-एक सीट मिल सकती है। 6 विधायक पर एक मंत्री बनाने का फार्मूला बताया जा रहा है। बता दें कि पिछली सरकार में भी यही फॉर्मूला लागू था। मालूम हो कि विधानसभा की कुल संख्या के 15 फीसदी के हिसाब से मुख्यमंत्री सहित अधिकतम 36 मंत्री बनाए जा सकते हैं। चर्चा है कि कि इस बार अपेक्षाकृत युवा चेहरों को मौका मिल सकता है।

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