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हिजाब हटाने का मामला पकड़ रहा तूल, पाकिस्तानी डॉन ने धमकी देते हुए नीतीश से माफी मांगने को कहा

by Dayanand Roy

 

पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एक मुस्लिम महिला डॉक्टर के चेहरे से हिजाब हटाने का विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस घटना से आहत  महिला डॉक्टर नुसरत परवीन ने फिलहाल बिहार छोड़ दिया है।

यहां मिली जानकारी के अनुसार वह अपने परिवार के पास कोलकाता पहुंच गई है। उसकी इच्छानुकूल अब बिहार में नौकरी करने की नहीं है। सूत्रों के मुताबिक परिवार वाले उसे समझाने का प्रयास कर रहे हैं। इस बीच पाकिस्तान का कुख्यात डॉन शहजाद भट्टी ने एक वीडियो जारी कर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से धमकी भरे अंदाज  में माफी मांगने को कहा है।

शहजाद भट्टी ने कहा है “अगर मुख्यमंत्री ने माफी नहीं मांगी तो ,यह मत कहना कि चेतावनी नहीं दी गई थी।”वीडियो में वह कहता है कि “सब लोगों ने देखा कि बिहार में क्या हुआ। एक बड़े पद पर बैठा व्यक्ति एक मुस्लिम महिला के साथ ऐसा व्यवहार करता है। फिर मुझ पर आरोप लगाए जाते हैं कि शहजाद भट्टी ने यह कर दिया, वह कर दिया। उस व्यक्ति के पास अभी भी समय है कि वह उस बच्ची और उस महिला से माफी मांगे।

अगर आज माफी नहीं मांगी गई, तो जिम्मेदार संस्थानों को कार्रवाई करनी चाहिए। बाद में यह मत कहना कि चेतावनी नहीं दी गई थी। बताया जाता है कि शहजाद भट्टी पाकिस्तान के पंजाब प्रांत का रहने वाला है और उस पर भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों में शामिल रहने के आरोप भी लगते रहे हैं। सोशल मीडिया पर वह खुद को इस्लाम और पाकिस्तान का सिपाही बताता है।

फिलहाल, इस पूरे मामले पर बिहार सरकार या मुख्यमंत्री की ओर से पाकिस्तानी डॉन की धमकी को लेकर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन हिजाब विवाद को लेकर सियासी और सामाजिक हलकों में बहस तेज हो गई है।

इस बीच, महिला डॉक्टर नुसरत परवीन अब कोलकाता में अपने परिवार के पास चली गई हैं। सूत्रों के अनुसार, 15 दिसंबर को हुई घटना के अगले ही दिन नुसरत बिहार से कोलकाता चली गई थी। बताया जा रहा है कि नुसरत परवीन का सपना डॉक्टर बनना था और उन्हें बिहार सरकार की नौकरी 20 दिसंबर को जॉइन करनी थी। हालांकि, मौजूदा हालात को देखते हुए उन्होंने अभी बिहार सरकार की सेवा में योगदान नहीं देने का फैसला किया है।

परिवार के सदस्य उन्हें वापस बिहार लौटने और नौकरी जॉइन करने के लिए समझाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन नुसरत अभी ऐसा करने का साहस नहीं जुटा पा रही हैं। परिवार ने आगे का निर्णय पूरी तरह नुसरत पर छोड़ दिया है। बताया जाता है कि 15 दिसंबर को हुई घटना के बाद नुसरत ने सबसे पहले अपने भाई को फोन कर पूरी जानकारी दी थी। बातचीत के दौरान वह काफी भावुक थीं।

इसके बाद भाई ने उन्हें कोलकाता आने की सलाह दी और अगले दिन नुसरत अपने परिवार के पास पहुंच गईं। नुसरत परवीन ने इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मैं यह नहीं कह रही हूं कि मुख्यमंत्री ने जानबूझकर ऐसा किया, लेकिन जो हुआ वह मुझे अच्छा नहीं लगा। वहां बहुत सारे लोग मौजूद थे, कुछ लोग हंस भी रहे थे। एक लड़की होने के नाते वह मेरे लिए अपमान जैसा था।

उन्होंने कहा कि मैंने स्कूल से लेकर कॉलेज तक हिजाब में ही पढ़ाई की है। घर, बाजार या मॉल, हर जगह मैं हिजाब पहनकर जाती रही हूं और कभी ऐसी स्थिति नहीं आई। मेरे अबू-अम्मी ने हमेशा यही सिखाया कि हिजाब हमारी संस्कृति का हिस्सा है।

नुसरत ने कहा कि मेरी गलती क्या थी, यह मुझे समझ नहीं आ रहा। मैं यह भी नहीं कह रही कि मुख्यमंत्री ने गलत किया, लेकिन अभी मेरा मन शांत नहीं है। उस दिन को याद करके मैं सहम जाती हूं। 15 दिसंबर को जो हुआ, वह ठीक नहीं हुआ। फिलहाल नुसरत परवीन के बिहार लौटने और नौकरी जॉइन करने को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।

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