
नवेन्दु उन्मेष

रांची टाइम्स और प्रभात खबर के पूर्व संपादक दिलीप कुमार दाराद की आज पुण्यतिथि है। इस अवसर पर वे मुझे बहुत याद आते हैं। 1982 में वे मुझे पत्रकारिता में लेकर आए थे। तब उन्होंने मुझे कहा था- इस काम को अच्छी तरह सीखो, कभी भूखे नहीं मरोगे।
उन्होंने मुझे समाचार लिखना-पढ़ना सिखलाया। यहां तक कि प्रेस कान्फेंस में अपनी बाते कैसे रखी जाये, यह भी बतलाया। वे मुझे तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के प्रेस कान्फेंस में भी ले गये थे।
हालांकि, मेरे पत्रकार बनने का विरोध करते हुए इंडियन एक्सप्रेस के रांची संवाददाता विजय कुमार श्रीवास्तव ने उनसे कहा था तुम उन्मन के बेटे को पत्रकारिता में लाकर बर्बाद करना चाहते हो।
विश्वमित्र के रांची संवाददाता रत्नेश कुमार जैन उन्हें दिलीप कुमार नारद कहकर पुकारते थे। दाराद जी एक दिलदार पत्रकार थे। उन्होंने बहुत लोगों को पत्रकारिता का प्रशिक्षण दिया।
दाराद जी की उत्कृष्ट लेखनी को समझते हुए 1956-57 में पटना से प्रकाशित नवराष्ट्र के संपादक देवव्रत शास्त्री ने उन्हें रांची से उद्योगभूमि नामक अखबार निकालने के लिए भेजा था।
यह अखबार कई वर्षों तक रांची से निकला। इसके बाद 1963 में दाराद जी ने रांची से आधुनिक तकनीक से लैस साप्ताहिक रांची टाइम्स नामक अखबार निकाला, जो लंबे अर्से तक रांची का लोकप्रिय अखबार रहा।
हालांकि, इस अखबार पर रांची, हजारीबाग, धनबाद में मुकदमे भी हुए जिसका सामना दारादजी ने दृढता से किया।
लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।


