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वोटिंग में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से नीतीश को होगा फायदा

by Dayanand Roy

पहले चरण की बढ़त से आसान  होगी सरकार बनाने की राह

महेश कुमार सिन्हा

 पटना : बिहार में विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 121 सीटों के लिए गुरुवार  को वोट  डाले जा चुके हैं।राज्य की 18 जिलों की इन सीटों पर  65 प्रतिशत मतदान हुआ है। यह आजादी के बाद अब तक का रिकॉर्ड  वोटिंग है।  इससे पहले 2020 में हुए पिछले विधानसभा चुनाव में सबसे अधिक 62.57 प्रतिशत मतदान हुआ था।

आमतौर पर अधिक मतदान को बदलाव का संकेत माना जाता है। लेकिन 2010 से 2020 तक लगातार वोट प्रतिशत बढ़ने के बावजूद नीतीश सरकार बरकरार रही। इस बार भी  मतदान में महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से अधिक रही । वोटिंग बढ़ने का मुख्य कारण भी मतदान में महिलाओं की बढ़ चढ़कर भागीदारी को ही बताया जा रहा है।दरअसल इस बार दोनों प्रतिद्वन्द्वी गठबंधनों ने महिलाओं के लिए  बड़ी-बड़ी घोषणाएं की है।

सूबे में इस बार  पड़ा ज्यादा वोट मौजूदा सरकार के समर्थन में है या इसके खिलाफ, यह तो चुनाव के नतीजे आने पर  ही पता चलेगा।वैसे आम राय यही है कि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं के अधिक वोट से नीतीश कुमार को फायदा होगा।

हालांकि,कुछ चुनाव विश्लेषकों का मानना है कि यदि युवाओं ने रोजगार  के नाम पर अधिक  वोट  दिए हैं तो इससे तेजस्वी यादव को लाभ हो सकता है। इस दफा पहली बार  पूरे दमखम के साथ चुनाव मैदान में उतरे प्रशांत किशोर की भी अनदेखी नहीं की की जा सकती है।

भले ही वे मुख्य मुकाबले में नहीं रहे हों,लेकिन अगर बदलाव के नाम पर  वोट  बढ़ा है तो यह पीके  के नैरेटिव का भी असर हो सकता है। ऐसे में उनकी जनसुराज पार्टी दोनों गठबंधनों को नुकसान पहुंचा सकती है।

पहले चरण में जिन 121 सीटों पर मतदान  हुए हैं,उनमें पिछली बार महागठबंधन और एनडीए के बीच  कांटे की टक्कर हुई थी। 2020 के उस चुनाव में महागठबंधन ने 61सीटों पर जीत दर्ज की थी। जबकि एनडीए को 59 सीटें हासिल हुई थी। एक सीट  लोजपा को मिली थी। लोजपा उस चुनाव में एनडीए में  नहीं थी और अकेले लड़ी थी।इस बार वह एनडीए का हिस्सा है।

पहले चरण की इन 121 सीटों में पिछले चुनाव में राजद  ने सबसे अधिक 42 सीटों पर जीत दर्ज की थी। उस चुनाव में उसे कुल 75 सीटें हासिल हुई थी। मतलब आधी से अधिक सीटें उसे पहले चरण में ही मिली थी। पिछले चुनाव में कुल 74 सीटों पर जीत हासिल करने वाली भाजपा को पहले चरण में 32 सीटें मिली थी। जदयू को 23 सीटों पर जीत हासिल हुई थी।

यानी पिछले चुनाव में मिली 43 सीटों में से आधी से अधिक उसे पहले चरण में ही मिली थी। 2020 के चुनाव में कांग्रेस ने 19 में से आठ,भाकपा-माले ने 12 में सात,भाकपा और माकपा ने दो-दो सीट पहले चरण में ही जीती थी। इस लिहाज से पहले चरण की बढ़त दोनों गठबंधनों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। एनडीए ने बढ़त बनाई तो महागठबंधन के लिए और महागठबंधन को अधिक सीटें मिली तो एनडीए के समक्ष सरकार बनाना चुनौतीपूर्ण होगा।

इस बार  पहले चरण  मे एनडीए की ओर से सबसे अधिक 57 उम्मीदवार जदयू ने उतारे थे। इनमें 34पर राजद, 11पर कांग्रेस, सात पर माले, दो पर माकपा और एक-एक सीट पर भाकपा और वीआईपी उम्मीदवार से उसकी भिड़ंत हुई। भाजपा ने पहले चरण में  48 सीटों पर  उम्मीदवार उतारा था। इनमें  25 पर उसकी लड़ाई राजद से थी। भाजपा की 12 सीटों पर कांग्रेस, 5 पर माले ,एक पर भाकपा,एक पर माकपा और एक सीट पर वीआईपी से टक्कर हुई। लोजपा(रा) 12 सीटों पर राजद और दो पर माले से भिड़ी।रालोमो का दो सीटों पर राजद से मुकाबला हुआ।

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