Home Bihar नीतीश ने 20 साल बाद छोड़ा गृह विभाग, सम्राट चौधरी को गृह और  बिजेंद्र यादव को वित्त विभाग की जिम्मेदारी

नीतीश ने 20 साल बाद छोड़ा गृह विभाग, सम्राट चौधरी को गृह और  बिजेंद्र यादव को वित्त विभाग की जिम्मेदारी

by Dayanand Roy

मंगल पांडेय फिर बने स्वास्थ्य मंत्री

पटना : बिहार में एनडीए की नई सरकार के शपथ ग्रहण के अगले दिन शुक्रवार को मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा कर दिया गया। इस बार नीतीश कैबिनेट में बड़ा बदलाव हुआ है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस बार गृह विभाग अपने पास न रखकर भाजपा को दे दिया है।  उन्होने अपने पास  सामान्य प्रशासन, कैबिनेट सचिवालय, निगरानी व निर्वाचन के अलावा वे सभी विभाग रखा है जो किसी को नहीं दिया गया है ।

सम्राट चौधरी को गृह मंत्री बनाया गया है। जबकि बिजेंद्र प्रसाद यादव वित्त मंतरी बनाये गए हैं। इस बार भी  सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा  उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभालेंगे।

मंत्रियों के विभाग इस प्रकार हैं

 1.सम्राट चौधरी (उप मुख्यमंत्री) गृह

2, विजय कुमार सिन्हा (उपमुख्यमंत्री) भूमि एवं राजस्व, खान एवं भूतत्व

3.विजय कुमार चौधरी-जल संसाधन,संसदीय कार्य, भवन निर्माण,सूचना एवं जनसंपर्क

 4. दिलीप जायसवाल-उद्योग  5.श्रवण कुमार-ग्रामीण विकास, परिवहन

6.अशोक चौधरी-ग्रामीण कार्य  7.विजेंद्र यादव- वित्त और ऊर्जा

8.मंगल पांडेय- स्वास्थ्य, विधि 9.लेशी सिंह-खाद्य उपभोक्ता  10.नितिन नवीन- पथ निर्माण, नगर विकास एवं आवास

11.मदन सहनी- समाज कल्याण 12.    संतोष सुमन- लघु जल संसाधन 13.सुनील कुमार-शिक्षा ,विज्ञान प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा 14.रामकृपाल यादव-कृषि

 15. जमा खान- अल्पसंख्यक कल्याण

16.संजय टाइगर-श्रम संसाधन 17.अरुण शंकर प्रसाद-पर्यटन, कला संस्कृति

 18.रमा निषाद- पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा कल्याण

 19सुरेन्द्र मेहता- पशु पालन एवं मतस्य 

20. नारायण प्रसाद- आपदा प्रबंधन

21.लखेन्द्र पासवान-अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण

 22.श्रेयसी सिंह-सूचना प्रौद्योगिकी एवं खेल मंत्री

 23.संजय सिंह-लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग

 24.दीपक प्रकाश- पंचायती राज 25. प्रमोद कुमार चंद्रवंशी- सहकारिता,पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन

 26. संजय पासवान-गन्ना उद्योग विभाग

बिहार की नई कैबिनेट में मंत्रियों के बीच विभागों के बंटवारे में वरिष्ठ मंत्रियों के अनुभव और क्षेत्रीय व जातीय संतुलन को ध्यान में रखा गया है। कई मंत्रालय पुराने चेहरों के पास ही रखा गया है।

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