
नई दिल्ली : कन्नड़ सिनेमा की पहली सुपरस्टार हीरोइन बी. सरोजा देवी का सोमवार को देहांत हो गया। उनकी उम्र 87 साल थी। इनका देहांत भी उम्र संबंधी बीमारियों के चलते हुआ है। जबकी कल तेलुगू सिनेमा के बहुत बड़े एक्टर कोटा श्रीनिवास राव का निधन हुआ था। वो भी उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे।

बी. सरोजा देवी सोमवार को बेंगलुरू के मल्लेशवरम इलाके में मौजूद अपने घर में बेहोश मिली। जिसके बाद उनके परिवार के लोग फौरन उन्हें हॉस्पिटल लेकर गए। लेकिन जांच के बाद डॉक्टरों ने बी. सरोजा देवी को मृत घोषित कर दिया। बी सरोजा देवी के निधन की खबर से साउथ फ़िल्म इंडस्ट्री में एक बार फिर से मातम पसर गया है।
अपने करियर में बी. सरोजा देवी ने कन्नड़, तमिल, तेलुगू हिंदी फ़िल्मों में काम किया था। बी. सरोजा देवी जी की पहली हिंदी फ़िल्म थी साल 1959 में आई पैगाम, जिसमें दिलीप कुमार व राज कुमार मुख्य भूमिकाओं में थे। इस पोस्ट में जो आप भारत भूषण जी के साथ बी. सरोजा जी को देख रहे हैं, वो साल 1964 की फ़िल्म “दूज का चांद” के एक दृश्य की तस्वीर है।
बी. सरोजा देवी 7 जनवरी 1938 को कर्नाटक में जन्मी थी। वो सत्रह साल की थी जब उन्होंने फ़िल्मों में काम करना शुरू कर दिया था। उनकी पहली फ़िल्म का नाम था महाकवि कालीदास। ये एक कन्नड़ भाषा की फ़िल्म थी। और ये फ़िल्म साल 1955 में रिलीज़ हुई थी। मगर बी. सरोजा देवी को शोहरत मिली 1958 की फ़िल्म नदोदी मनन से। ये एक तमिल भाषी फ़िल्म थी। और इस फ़िल्म में एम.जी.रामचंद्रन उनके हीरो थे।
सिनेमा में अनुकरणीय योगदान करने के लिए भारत सरकार ने बी. सरोजा देवी को साल 1969 में पद्मश्री व साल 1992 में पद्म भूषण सम्मानों से नवाज़ा था। जबकी तमिलनाडु सरकार ने भी बी. सरोजा देवी को कलाईममणि पुरस्कार से सम्मानित किया था। और डॉक्टरेट की मानद उपाधि भी दी थी।


